Supreme Court : UPSC Exam में बड़ा बदलाव
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दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा में बड़ा बदलाव कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देते हुये संघ लोक सेवा आयोग ने शपथपत्र लेश कर बताया है कि प्रीलिम्स के बाद ही अब अस्थाई आंसर शीट जारी किया जाएगा।

संघ लोक सेवा आयोग UPSC ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया कि अब सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद अस्थायी आंसर शीट प्रकाशित करेगा। इसे आयोग की नीतिगत व्यवस्था में बड़ा और व्यापक बदलाव माना जा रहा है। अब तक की व्यवस्था पर नजर डालें तो UPSC अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही आंसर शीट जारी करता था। नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों को परीक्षा के तुरंत बाद अपने उत्तरों की जांच का अवसर मिलेगा, जिससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

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संघ लोक सेवा आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शपथपत्र पेश करते हुए यह जानकारी दी है। उस याचिका पर आयोग ने जानकारी दी है जिसमे याचिकाकर्ता ने सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान आयोग ने कोर्ट से कहा था कि परीक्षा के अगले दिन आंसर शीट जारी करना विपरीत प्रभाव डालने वाला कदम होगा। आयोग ने परिणाम में विलंब के साथ ही भ्रम पैदा होने की आशंका जताई थी।

शपथपत्र में बदलाव की दी जानकारी


संघ लोक सेवा आयोग ने कोर्ट में पेश शपथपत्र में नई पालिसी के तहत बदलाव की जानकारी दी है। नई व्यवस्था के अनुसार प्रीलिम्स परीक्षा के बाद अस्थायी उत्तर कुंजी जारी की जाएगी और अभ्यर्थियों से आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। प्रत्येक आपत्ति कम-से-कम तीन प्रमाणिक स्रोतों से समर्थित होनी चाहिए।

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विशेषज्ञ समिति करेगी निराकरण


विशेषज्ञ समिति उन आपत्तियों की समीक्षा कर अंतिम उत्तर कुंजी तैयार करेगी, जो परिणाम घोषित करने का आधार बनेगी। अंतिम आंसर शीट हमेशा की तरह मेंस और इंटरव्यू के परिणामों के बाद प्रकाशित की जाएगी।
UPSC ने कहा कि यह निर्णय जल्द लागू किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान होगा।

याचिकाकर्ता ने पारदर्शिता की उठाई थी मांग


UPSC अब तक प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी अंक और कट-ऑफ केवल अंतिम परिणाम के बाद ही जारी करता है, जबकि पूरी परीक्षा प्रक्रिया लगभग एक वर्ष तक चलती है। इससे वे अभ्यर्थी, जो मुख्य परीक्षा में नहीं पहुंच पाते, अपने प्रदर्शन और अंकों के आधार पर मूल्यांकन नहीं कर पाते। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उत्तर कुंजी और कट-ऑफ देर से जारी होने से वे यह भी नहीं जान पाते कि उनकी अस्वीकृति का कारण क्या था।

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