रायपुर। ईओडब्ल्यू ने छापे के बाद राजस्व विभाग के दो अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण/एन्टी करप्शन ब्यूरो में पटवारी से राजस्व निरीक्षक प्रमोशन घोटाला से संबंधित पंजीकृत अपराध क्रमांक- 64@2025 धारा 7(सी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम1988 एवं संशोधित 2018 एवं धारा 420, 467, 468, 471, 120बी भादवि में लगातार अधिकारी कर्मचारी एवं अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है।
प्रमोशन घोटाले में आरोपी वीरेन्द्र जाटव, सहायक सांख्यिकी अधिकारी, कार्यालय आयुक्त भू-अभिलेख रायपुर एवं हेमन्त कौशिक, सहायक सांख्यिकी अधिकारी, कार्यालय क्षेत्रीय उप आयुक्त भू-अभिलेख रायपुर के विरूद्ध स्वयं एवं वरिष्ठ अधिकारियों को असम्यक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर प्रश्नपत्र लीक करने एवं परीक्षा पूर्व प्रश्नों की तैयारी कराने के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य होने पर गिरफ्तार किया गया है। दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट में पेश किया।
कैसे रचा गया घोटाला
आरआई प्रमोशन घोटाले का पूरा खेल बड़ी योजना के साथ रचा गया था। आरोप है कि पटवारी से आरआई बनाए जाने की प्रक्रिया 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान जानबूझकर शुरू की गई, ताकि सत्ता परिवर्तन के बीच गड़बड़ी छिपाई जा सके। अधिकारियों ने आरोपियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र हल करवा दिए थे। कई पटवारियों से 10-10 लाख रुपये तक वसूले गए। इसके बदले उन्हें रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति दी गई।
शिकायत में यह भी सामने आया कि परीक्षा से पहले ही पेपर लीक कर दिया गया था। जिन उम्मीदवारों ने पैसे दिए थे, उन्हें एक ही केंद्र पर बिठाकर प्रश्नपत्र हल कराए गए। कई जगह एक ही रोल नंबर दो या तीन उम्मीदवारों को आवंटित किए गए।
ओएमआर शीट में मोबाइल नंबर, गोपनीयता पर सवाल
कमिश्नर लैंड रिकॉर्ड ऑफिस द्वारा आयोजित इस परीक्षा में ओएमआर शीट पर परीक्षार्थियों से मोबाइल नंबर लिखवाए गए, जो परीक्षा की गोपनीयता के खिलाफ है। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में बाद में संशोधन किए गए और नाम बदलकर नए उम्मीदवारों को चयन सूची में शामिल किया गया।
जांच कमेटी ने मानी गड़बड़ी, फिर से परीक्षा की सिफारिश
सरकार द्वारा नियुक्त आईएएस केडी कुंजाम की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों की पुष्टि की। रिपोर्ट में कहा गया कि परीक्षा से पहले कई चयनित उम्मीदवारों को एक ही स्थान पर एकत्र कर प्रश्नपत्र हल कराए गए। कमेटी ने पूरी परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने की सिफारिश की।
परिवारजनों को एक साथ पास किया गया
जांच में यह भी सामने आया कि एक ही परिवार के सदस्यों को एक साथ चयन सूची में शामिल किया गया। पति-पत्नी, सगे भाई, साली और रिश्तेदारों को एक ही परीक्षा केंद्र पर पास करवाया गया। यहां तक कि एक आईएएस अधिकारी का भतीजा, जिसने पाँच साल की सेवा भी पूरी नहीं की थी, उसे भी आरआई बना दिया गया।
पाठ्यक्रम में बदलाव और पेपर आउट ऑफ कोर्स
कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व निरीक्षक परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम दो बार जारी किया गया था, लेकिन प्रश्नपत्र में ‘भुइयां सॉफ्टवेयर’ से जुड़े सात प्रश्न पूछे गए, जबकि यह सिलेबस में शामिल ही नहीं था। इससे यह स्पष्ट होता है कि पेपर जानबूझकर भ्रमित करने वाला बनाया गया था ताकि सिर्फ तय उम्मीदवार ही पास हो सकें।
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आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने एसीबी और ईओडब्ल्यू को पूरे घोटाले की जांच सौंप दी है। फिलहाल दर्जनभर अफसरों और कर्मचारियों के घरों से दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और संदिग्ध कागजात बरामद किए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में मिली जानकारी के आधार पर और भी छापे की संभावना जताई जा रही है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा “आंतरिक भर्ती घोटाला” हो सकता है, जिसमें प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत के संकेत मिले हैं। जांच के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।








