Civil India News App Download
📢 Advertise With Us

MDM की गुणवत्ता तय मापदंड के आधार पर नहीं मिली तो स्व सहायता समूहों से अनुबंध होगा निरस्त

Share on

रायपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की नाराजगी के बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बनने वाले मध्यान्ह भोजन एमडीएम के गुणवत्ता की जांच की जा रही है। जांच के दौरान कैलोरी और प्राेटीन की जांच की जा रही है। तय मापदंड के अनुसार भोजन ना बनने पर स्व सहायता समूहों से किए गए अनुबंध को निरस्त किया जाएगा। चीफ सिकरेट्री के आदेश के बाद अब कड़ाई बरतने का निर्णय लिया है। एमडीएम बनने के बाद सबसे पहले भोजन शिक्षक चख रहे हैं, उनके द्वारा सही रिपोर्ट देने के बाद बच्चों को भोजन परोसा जा रहा है। शिक्षक जब भोजन चखेंगे तो उसे रजिस्टर में दर्ज भी कर रहे हैं।

Also Read – सुप्रीम कोर्ट ने NCTE से पूछा स्पेशल एजुकेटर्स को TET पास होना जरुरी है या नहीं?

📢
Advertise With Us
Reach thousands of readers with Civil India News
Get Started →

चीफ सिकरेट्री के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया है। एमडीएम में कैलोरी और प्रोटीन की जांच के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने अमरावती के लैब से अनुबंध किया है। लैब के तकनीकी स्टाफ एमडीएम की गुणवत्ता जांच करने के साथ ही प्रोटीन और कैलोरी की भी जांच कर रहे हैं। एमडीएम में कैलोरी की कमी की शिकायत मिल रही थी। इसके पीछे कारण बताया था कि एमडीएम में बच्चों को चावल तो मिल रहा है, दाल प्रतिदिन नहीं बन रहा है, अगर बना भी रहे हैं तो क्वालिटी इतनी घटिया है कि बच्चों को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं मिल पा रही है।

Also Read – रायपुर में पुलिस महानिदेशकों, महानिरीक्षकों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड एकीकरण के विस्तारित उपयोग का किया आह्वान

45 हजार स्कूलों में पढ़ाई कर रहे 55 लाख बच्चे, 25 लाख बच्चों को एमडीएम

📢
Advertise With Us
Reach thousands of readers with Civil India News
Get Started →

आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में 45 हजार सरकारी स्कूलों में 55 लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से 25 लाख बच्चों को एमडीएम परोसा जाता है। एमडीएम योजना पहली से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए है। अधिकांश में स्व सहायता समूहों को ही जिम्मेदारी दी गई है। एनजीओ के माध्यम से बन रहे मध्यान्ह भोजन की निगरानी भी बेहद जरुरी है। राज्य सरकार की व्यवस्था के तहत भोजन को विशेष प्रकार के पॉलिथिन में पैक कर लैब भेजा रहा है। लैब में एमडीएम की क्वालिटी की जांच की जा रही है।


Share on
Civil India News App Download
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!