छत्तीसगढ़ की नदियों के संरक्षण को लेकर राज्य सरकार से हाई कोर्ट ने मांगा ठोस प्लान
Share on

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की नदियों की बिगड़ती हालत को देखते हुए बिलासपुर हाई कोर्ट अब पूरी गंभीरता के साथ नदी संरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार से जवाब मांग रहा है। डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि केवल समिति बना देने या बैठकों की औपचारिकता निभाने से काम पूरा नहीं होता, धरातल पर ठोस, दिखाई देने वाला और समयबद्ध कार्य होना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह छत्तीसगढ़ की प्रमुख नदियों अर्पा, लीलागर, सोनपन और तिपान के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए एक स्पष्ट, क्रियान्वित होने योग्य और समयबद्ध वर्क-प्लान पेश करे।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने विशेष रूप से अरपा नदी के उद्गम स्थल के पास की निजी भूमि के अधिग्रहण, भू-अर्जन और सुरक्षा कार्यों पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। कोर्ट का कहना है कि नदियों के उद्गम स्थल ही जीवनरेखा होते हैं और यदि वहीं सुरक्षा के प्रयास कमजोर रहेंगे, तो पूरी नदी के पुनर्जीवन की पहल अधूरी रह जाएगी।

Also Read – 30 पेज की रिपोर्ट में सामने गिनाई 16 खामियां, लचर सिस्टम पर उठाए सवाल

राज्य सरकार की ओर से जल संसाधन विभाग के सचिव ने शपथ पत्र के साथ जानकारी प्रस्तुत की। इसमें बताया गया कि कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और बिलासपुर जिलों में नदी उद्गम की पहचान और संरक्षण कार्यों के लिए राजस्व, पंचायत, वन, खनिज, जल संसाधन और नगरीय निकायों के अधिकारियों की संयुक्त उप-समितियाँ बनाई गई हैं। जीपीएम जिले में 22 नवंबर को ऐसी समिति की बैठक भी की गई। हालांकि डिवीजन बेंच इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी। बेंच ने कहा कि केवल समितियों का गठन और बैठकें पर्याप्त नहीं हैं व्यावहारिक प्रगति और जमीन पर दिखने वाले कार्यों की जानकारी अनिवार्य है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार, न्याय मित्रों और याचिकाकर्ता से सुझाव भी मांगे। बेंच ने कहा कि नदी संरक्षण और पुनर्जीवन जैसी वैज्ञानिक प्रक्रिया में विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए तकनीकी विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, पर्यावरणविद, जल-गर्भशास्त्री, नदी विज्ञान के जानकार और अन्य अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक व्यापक राज्य स्तरीय नदी पुनर्जीवन योजना तैयार की जानी चाहिए।

Also Read – नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई, हाई कोर्ट ने प्रवेश को फैसले से रखा बाधित

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से विशेष रूप से इन बिंदुओं पर विस्तृत जवाब मांगा है

•   नदी की उत्पत्ति की पहचान किस चरण में है?
•   अब तक जमीनी स्तर पर कौन-कौन से काम किए गए हैं?
•   पुनर्जीवन के लिए कौन-सी कार्रवाइयाँ प्रस्तावित हैं और उनका टाइमलाइन क्या है?

हाई कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि छत्तीसगढ़ की नदियों के संरक्षण के मामले में अब केवल कागज़ी कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट की मंशा है कि नदियों को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार एक ऐसी कार्ययोजना बनाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जलस्रोत सुरक्षित और संरक्षित रह सकें।


Share on

Related Posts

CG High Court News: बगैर मान्यता, स्कूलों ने एडमिशन के लिए जारी किया विज्ञापन: नाराज हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से शपथ पत्र के साथ मांगा जवाब।

Share on

Share onCG High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में गजब हो रहा है। बिना मान्यता वाले स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूलों में एडमिशन के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया जा रहा है। हाई


Share on
Read More

CG Transfer News: छत्तीसगढ़ बलरामपुर जिले में राजस्व विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। 58 पटवारियों का एक साथ तबादला आदेश जारी किया है।

Share on

Share onCG Transfer News: बलरामपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और राजस्व विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए एक


Share on
Read More

बड़ी खबर

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, सरकारी कर्मचारी को बिना विभागीय जांच के सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। बर्खास्तगी से पहले विभागीय जांच का आदेश जारी करना और संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष का पर्याप्त अवसर देना होगा।

Read More »

About Civil India

© 2025 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited

error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!