Bilaspur Highcourt News:– छत्तीसगढ़ में 14 मंत्री, सुप्रीम कोर्ट में भी इसी तरह का है मामला लंबित, पीआईएल की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कुछ ऐसा कहा
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Bilaspur Highcourt News:– मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या 14 है। हाल के दिनों में तीन मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसके बाद से ही विवाद की स्थिति बनने लगी है। हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन बताते हुए एक मंत्री को हटाने की मांग की है। पीआईएल की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हम तो आज ही पीआईएल को डिसाइड कर देते।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार में तीन नए मंत्रियों की शपथ लेने के बाद अब मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 14 हो गई है। इसे असंवैधानिक बताते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। पीआईएल में एक मंत्री को हटाने की मांग की है। सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से पूछा कि हमने बीते सुनवाई में याचिकाकर्ता के बैकग्राउंड को लेकर शपथ पत्र पेश करने कहा था। इस पर अधिवक्ता ने शपथ पत्र पेश करने की जानकारी दी।

सामाजिक कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। जनहित याचिका में मंत्रिमंडल में 14 मंत्री बनाए जाने को असंवैधानिक बताते हुए एक मंत्री को हटाने की मांग की है। मंत्रिमंडल के सदस्यों के अनुपात में नियमों के अनुसार केवल 13 मंत्री हो सकते हैं। छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीटों की तुलना में 14 मंत्री बनने पर 15% की सीमा क्रॉस कर दी गई है। यह संविधान के अनुच्छेद 164(1) का उल्लंघन है। पिछले सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्यों का शपथ पत्र मांगा गया था।

0 राज्य सरकार के अधिवक्ता ने डिवीजन बेंच को दी जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी कर रहे ला अफसर ने बेंच को बताया इसी तरह का मध्य प्रदेश सरकार का एक मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। जिसमें 164 ( 1 ए) की व्याख्या होनी है। यह मामला मध्य प्रदेश शिवराज सिंह कैबिनेट का है। जिसमें मंत्रिमंडल की न्यूनतम और अधिकतम सीमा को लेकर याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिका इंफेक्चुअस हो गया है। तब राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

पीआईएल की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि चूंकि इस तरह का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट से ही डिसाइड कराना ज्यादा उचित रहेगा। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दो सप्ताह का समय मांगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की मांग को स्वीकार करते हुए डिवीजन बेंच ने अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तिथि तय कर दी है।


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