Biranpur violence case: बेमेतरा। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बिरनपुर गांव में हुई बहुचर्चित हिंसा मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने रहीम मोहम्मद और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद की हत्या के प्रकरण में आरोपी बनाए गए 17 लोगों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है और उनकी रिहाई का आदेश जारी किया है।
करीब तीन वर्षों तक चली सुनवाई के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। इस मामले में कुल 52 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, लेकिन स्वतंत्र गवाहों ने अभियोजन का समर्थन नहीं किया। ऐसे में आरोप प्रमाणित नहीं हो सके और सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला
8 अप्रैल 2023 को बिरनपुर गांव में दो पक्षों के बीच विवाद हिंसक रूप ले बैठा था, जिसमें 23 वर्षीय भुनेश्वर साहू की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। तीन दिन बाद, 11 अप्रैल को शक्ति घाट क्षेत्र में रहीम मोहम्मद और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद के शव बरामद किए गए थे। पुलिस ने इस मामले में 17 लोगों को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया था। घटना के बाद क्षेत्र में धारा 144 लागू की गई थी और बिरनपुर गांव में लगभग दो सप्ताह तक कर्फ्यू की स्थिति रही। मामले ने प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी थी।
सियासत पर भी पड़ा था असर
बिरनपुर हिंसा का प्रभाव 2023 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला। भुनेश्वर साहू के पिता ईश्वर साहू को भाजपा ने टिकट दिया था और उन्होंने तत्कालीन मंत्री रविंद्र चौबे को पराजित कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। इस घटना के बाद कई क्षेत्रों में वोटों का ध्रुवीकरण भी देखने को मिला था। गौरतलब है कि भुनेश्वर साहू हत्याकांड का मामला अभी रायपुर स्थित सीबीआई कोर्ट में विचाराधीन है, जिसमें आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं रहीम और ईदुल मोहम्मद हत्याकांड में बेमेतरा कोर्ट से 17 आरोपियों को राहत मिल गई है।








