बिलासपुर। गेवरा–बिलासपुर मेमू ट्रेन हादसे पर रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) की 30 पेज की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे तंत्र पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। रिपोर्ट में कुल 16 बड़ी और गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें ट्रेन संचालन में लापरवाही, सिग्नल नियमों की अनदेखी, तकनीकी कमजोरियाँ और आपातकालीन सेवाओं की धीमी प्रतिक्रिया प्रमुख हैं। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में कम से कम सात मिनट की देरी को CRS ने बेहद गंभीर चूक माना है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि रेस्क्यू ऑपरेशन समय पर शुरू हो जाता तो कई और जानें बचाई जा सकती थीं।
रिपोर्ट में मृत लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट पर दुर्घटना की प्राथमिक जिम्मेदारी डाली गई है। CRS का कहना है कि लोको पायलट ने गंभीर लापरवाही बरती और सही निर्णय लेने में असफल रहा। चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि लोको पायलट एप्टीट्यूड टेस्ट में फेल हुआ था, इसके बावजूद उसे यात्री ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इतना ही नहीं, रिपोर्ट बताती है कि लोको पायलट ट्रेन चलाते समय कई जगह रेल अफसरों से पूछकर निर्णय ले रहा था। इससे यह सवाल उठता है कि उस पर निगरानी रखने और उसे ट्रेन संचालन की अनुमति देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सिस्टम की खामियों को चिन्हित करना एक बात है, लेकिन उन खामियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई न करना और उन्हें ‘अभयदान’ देना बड़ी समस्या है। क्यों उन अफसरों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा जो एप्टीट्यूड टेस्ट में फेल चालक को यात्री ट्रेन की जिम्मेदारी सौंपने जैसे फैसले में शामिल थे? CRS रिपोर्ट ने इस प्रशासनिक ढिलाई को भी अप्रत्यक्ष रूप से संकेतित किया है।
CRS रिपोर्ट में प्रमुख सुझाव और तकनीकी सुधार
CRS ने भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं, जिनमें शामिल हैं,
• मेमू ट्रेनों में वीडियो सर्विलांस सिस्टम को RDSO मानकों के तहत तुरंत लागू किया जाए।
• मेमू ट्रेनों में एडवांस ऑक्ज़िलियरी वार्निंग सिस्टम (AWS) लगाया जाए, जो सिग्नल तोड़े जाने पर स्वतः इमरजेंसी ब्रेक लगा दे।
• लोको पायलट और ALP की योग्यता प्रमाणन प्रक्रिया ACTM मानकों के अनुसार हो।
• दुर्घटना में मारे गए क्रू मेंबर्स के पोस्टमॉर्टम में ब्लड अल्कोहल टेस्ट अनिवार्य हो।
• मेमू ट्रेनों में रियल-टाइम डेटा ट्रांसमिशन सिस्टम स्थापित किया जाए।
• एप्टीट्यूड टेस्ट पास लोको पायलटों की कमी दूर की जाए और प्रशिक्षण व्यवस्था सुधारी जाए।
• ALP की ड्यूटी में इमरजेंसी ब्रेक लगाने के स्पष्ट निर्देश जनरल रूल्स में शामिल हों।
• सभी निगरानी उपकरणों की घड़ियों को GPS टाइम से ऑटो-सिंक करने की व्यवस्था हो।
ये सुझाव बताते हैं कि सिस्टम में तकनीकी और प्रक्रियागत सुधार की आवश्यकता बेहद व्यापक है।
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दुर्घटना के बाद राहत कार्य में 7 मिनट की देरी
जांच रिपोर्ट के अनुसार हादसे की सूचना 3:55 बजे मिली और 3:56 बजे रिलीफ मेडिकल ट्रेन भेजने के आदेश जारी हुए। इसके बावजूद स्टाफ को अलर्ट करने वाला इमरजेंसी हूटर लगभग सात मिनट देर से, यानी 4:04 से 4:09 बजे के बीच बजा। यह देरी गंभीर रूप से घायल यात्रियों के लिए भारी साबित हुई। साथ ही, मालगाड़ी और मेमू ट्रेन की जोरदार भिड़ंत के कारण कोच के मुड़ जाने से यात्रियों को बाहर निकालने में काफी दिक्कतें आईं, जिससे रेस्क्यू कार्य और धीमा हो गया।








