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जिला उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: मल्टी ऑर्गन फेल्योर है गंभीर बीमारी, मृतक की पत्नी काे बीमा कंपनी देगी साढ़े 45 लाख मुआवजा

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बिलासपुर। स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के जरिए हेल्थ इंश्योरेंस कराने वालों के लिए यह बड़ी खबर और उपभोक्ता आयोग का महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है। क्षतिपूर्ति की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने मृतक की पत्नी को साढ़े 45 लाख रुपये का क्षतिपूर्ति भुगतान करने का निर्देश हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को दिया है। आयोग ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई है कि बीमा करने के बाद कंपनी ने मृतक के परिजनों पर सहृदयता नहीं दिखाई। क्षतिपूर्ति देने के बाद शब्दों के जाल में उलझाया और अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। बीमा कंपनी ने ऐसा कर सेवा में कमी की है।

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से लगे मोपका के रहने वाले मनोज यादव ने ऋण सुरक्षा के लिए त्रेयी इक्विपमेंट फाइनेंस लिमिटेड के जरिए केयर हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी ली थी। यह पॉलिसी 31 अगस्त 2017 से 30 अगस्त 2021 तक प्रभावी थी। बीमा राशि 45 लाख 56 हजार रुपये की थी। इसके लिए मनोज ने 1.54 लाख का एकमुश्त प्रीमियम जमा किया गया था। 11 सितंबर 2020 को मनोज के पेशाब में खून आने की शिकायत पर अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 25 सितंबर 2020 को मनोज की मृत्यु हो गई। मेडिकल रिपोर्ट में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट समेत कई लक्षणों की जानकारी दी गई थी। पति की मौत के बाद पत्नी पूर्णिमा यादव ने बीमा कंपनी में आवेदन कर बीमा राशि के भुगतान की मांग की।

बीमा कंपनी ने मल्टी-ऑर्गन फेल्योर को मौत के लिए गंभीर बीमारी नहीं माना और आवेदन को अस्वीकार करते हुए बीमा राशि देने से इनकार कर दिया। बीमा कंपनी के इस निर्णय को चुनौती देते हुए पूर्णिमा ने जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष मामला दायर किया। आवेदन पर आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक पांडे की पीठ में सुनवाई हुई। पीठ ने बीमा कंपनी के रवैये को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए बीमा कंपनी केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड को मृतक की विधवा को ब्याज सहित 45.56 लाख रुपए देने का आदेश दिया है।

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जिला उपपभोक्ता आयोग ने मेडिकल रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि ऑक्सीजन और रक्त प्रवाह की कमी के कारण मरीज का मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो गया। इस कारण उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई, जो मल्टी-ऑर्गन फेल्योर का नतीजा था। आयोग ने अपने आदेश में साफ कहा कि मरीज की स्थिति मल्टी-ऑर्गन फेल्योर की थी, यह स्थिति गंभीर या जानलेवा बीमारी के ही अंतर्गत आती है।

केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने जनवरी 2021 में पूर्णिमा के दावे को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि मृत्यु क्रिटिकल इलनेस बेनीफिट के तहत नहीं आती। पॉलिसी में केवल सीमित बीमारियों जैसे कैंसर, अंतिम चरण के गुर्दे की विफलता और कोमा को ही गंभीर बीमारी की श्रेणी में रखा गया है। जिला उजिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी के शब्दों की तकनीकी व्याख्या कर दावा अस्वीकार किया है।

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जिला उपभोक्त आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिनों के भीतर 45 लाख 56 हजार देने का आदेश जारी किया है। इस राशि पर 13 अगस्त 2021 से भुगतान की तिथि तक 9 फीसदी ब्याज देना होगा। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार और वाद व्यय के तौर पर 5 हजार देने होंगे।जो स्पष्ट रूप से गंभीर और जानलेवा बीमारी की श्रेणी में आती है।


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