सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मद्देनजर पशुधन विभाग ने जारी किया आदेश, स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राचार्य और हेड मास्टर को सौंपी जिम्मेदारी

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रायपुर। स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के राज्य सरकार को आवारा कुत्तों से सुरक्षा का निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के परिपालन में राज्य सरकार ने पशुधन विकास विभाग ने 13 नवंबर 2025 को आवारा कुत्तों से सुरक्षा के संबंध में निर्देश जारी किया गया है। निर्देश के मद्देनजर स्कूल शिक्षा विभाग ने आवारा कुत्तों से बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी स्कूलों के प्रिंसिपल व संस्था प्रमुख को नोडल अधिकारी बनाने के साथ ही जिम्मेदारी सौंपी हैद्ध

आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और लोगों की दिक्कतों को देखते हुए मीडिया में लगातार प्रकाशित हो रहे रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रारंभ की थी। जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर आवारा कुत्तों से आमजनों की सुरक्षा का निर्देश जारी किया है।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तारतम्य में पशुधन विभाग ने एक आदेश जारी कर इस पर प्रभावी रोक लगाने और गंभीरता के साथ काम करने की हिदायत दी है। पशुधन विभाग के निर्देश के तहत स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के स्कूलों के प्रिंसिपल व संस्था प्रमुख को नोडल अधिकारी बनाया है। ये अधिकारी स्कूल परिसर और आसपास दिखने वाले आवारा कुत्तों की जानकारी तुरंत ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या नगर निगम के डॉग क्रैचर नोडल अधिकारी को देंगे। साथ ही स्कूल में कुत्तों की एंट्री रोकने के लिए जरूरी इंतजाम भी करेंगे। यदि किसी बच्चे को आवारा कुत्ते द्वारा काटने की घटना होती है, तो बच्चे को तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की गई है। शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि सभी स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार हो। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप और पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे प्रदेश में सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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शासन के नए निर्देश के तहत सभी स्कूलों को एक निर्धारित प्रपत्र दिया गया है, जिसमें परिसर या उसके आसपास दिखने वाले आवारा कुत्तों का विवरण हर सात दिन में भरकर जमा करना अनिवार्य होगा। प्रपत्र में कुत्ते का प्रकार, रंग, विशेष पहचान, देखने का समय और नर या मादा होने जैसी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके साथ ही संस्था का नाम, संकुल और विकासखंड का विवरण भी अनिवार्य किया गया। है।


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