SIR के बाद शिक्षक आज से ट्रेनिंग में व्यस्त हो जाएंगे। पेंड्रा डाइट का अलग फरमान आ गया है। बोर्ड परीक्षा के छात्रों की भविष्य की चिंता किसी को नहीं है।
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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों पर लगातार बढ़ते काम के दबाव और प्रशासनिक निर्णयों की अव्यवस्था ने अब सीधे-सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। पहले SIR ने शिक्षकों को स्कूलों से दूर रखा, जहां BLO ड्यूटी के नाम पर घर-घर सर्वे, दस्तावेजों की जांच और अपलोडिंग जैसे भारी कामों का बोझ उनके सिर पर डाल दिया गया। अब उसी बीच अचानक विभागीय प्रशिक्षण का नया दौर शुरू हो गया है। इससे स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों की पढ़ाई लगभग चौपट होकर रह गई है। शिक्षकों का कहना है कि प्रशासन को इस बात की कोई चिंता ही नहीं है कि इतने लगातार निर्देशों, तैनातियों और ट्रेनिंग के बीच वे पढ़ाई कब और कैसे करवाएं।

प्रदेश में बोर्ड परिणाम सुधारने के लिए DPI, समग्र शिक्षा और SCERT लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर ने नए पैटर्न पर आधारित प्रश्न पत्र, ब्लूप्रिंट और अंकों के वितरण में कई बदलाव किए हैं। हर जिले में मिशन 90 प्लस, मिशन 100 और मिशन 80 प्लस जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों और छात्रों पर काम का दोहरा बोझ पहले ही था। इसके बावजूद विभाग ने 5 सितंबर 2025 को जारी अपनी ही चिट्ठी को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें साफ लिखा था कि वर्तमान में किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा और सभी प्रस्तावित प्रशिक्षण स्थगित रहेंगे। इसके बावजूद पेंड्रा के DIET सहित कई संस्थानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है।

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सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन प्रशिक्षणों, BLO ड्यूटी और शैक्षणिक कार्यों के बीच संतुलन बनाना शिक्षकों के लिए लगभग असंभव हो गया है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि इस तरह के प्रशिक्षणों पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो बोर्ड परीक्षा के परिणामों की जिम्मेदारी प्रशिक्षण कराने वाली संस्थाओं पर होगी। उनका कहना है कि विद्यार्थियों के भविष्य से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता, और विभागीय अफसरों को यह समझना चाहिए कि शिक्षक मशीन नहीं हैं जो हर आदेश को एक साथ पूरा कर सकें।

इस बीच DIET ने एक नया कैलेंडर जारी करते हुए 8 दिसंबर से 10 जनवरी तक प्राथमिक शिक्षकों का ऑफलाइन प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। यह वही प्रशिक्षण है, जिसकी ऑनलाइन संस्करण जुलाई में दिया गया था पर ऑफलाइन मॉड्यूल लंबित था। अब जब आधे से ज्यादा स्कूलों में छमाही परीक्षा की तैयारी चल रही है और SIR का दबाव भी जारी है, तब प्रशिक्षण का यह नया आदेश शिक्षकों के लिए संकट बन गया है। कैलेंडर के अनुसार संभाग के 6863 शिक्षकों को सुबह 9:30 बजे से शाम 5 बजे तक प्रशिक्षण में उपस्थित रहना है, जबकि इन शिक्षकों में से आधे BLO ड्यूटी में लगे हैं और घर-घर दौड़कर गणना पत्रक एकत्र कर रहे हैं। BLO को 11 दिसंबर तक सारे दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने हैं, जिसके कारण कई शिक्षकों को दिन-रात काम करना पड़ रहा है।

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ड्यूटी और प्रशिक्षण में उलझे शिक्षक कहते हैं कि विभाग को इस बात का बिल्कुल ध्यान नहीं है कि स्कूलों में दिसंबर में छमाही परीक्षा भी होती है, और उसके लिए पाठ्यक्रम का दोहराव और प्रश्नपत्रों की तैयारी भी जरूरी है। जब शिक्षक लगातार प्रशिक्षण में रहेंगे, BLO ड्यूटी देंगे और स्कूल में समय नहीं दे पाएंगे, तो पढ़ाई अपने-आप प्रभावित होगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षा 1 से 3 तक के शिक्षकों को पाँच दिन और कक्षा 4 से 5 के शिक्षकों को पाँच दिन प्रशिक्षण लेना है। पहले तीन दिन हिंदी और गणित, चौथे दिन अंग्रेज़ी और पाँचवे दिन पर्यावरण-कला योग का प्रशिक्षण होगा। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल खुलने के बाद से उन्हें लगातार किसी न किसी प्रशिक्षण में भेजा जा रहा है, जिससे कक्षाओं का माहौल बुरी तरह बिगड़ गया है।

डाइट के आदेश के बिल्कुल उलट, राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा ने 4 सितंबर 2025 को स्पष्ट आदेश जारी किया था कि बिना अनुमति के किसी भी प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित नहीं किया जाएगा और सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम अगली सूचना तक स्थगित रहेंगे। यही वह आदेश है जिसे विभागीय स्तर पर लागू नहीं किया गया और कई जगहों पर प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है। यही कारण है कि शिक्षकों और अभिभावकों दोनों में गहरी नाराज़गी है। सार यह है कि SIR, विभागीय प्रशिक्षण और लगातार बदलते निर्देशों के कारण पढ़ाई का शैक्षणिक ढांचा बुरी तरह हिल गया है। बोर्ड परीक्षाओं में मुश्किलें बढ़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। जब तक शिक्षा विभाग प्रशिक्षण और ड्यूटी के बीच संतुलन नहीं बनाएगा और स्कूलों में नियमित पढ़ाई के लिए शिक्षकों को समय नहीं देगा, तब तक विद्यार्थियों का भविष्य असुरक्षित ही रहेगा।


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