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फर्जी प्रवेश पत्र के साथ पहुंची परीक्षार्थी: पुलिस ने दर्ज किया FIR

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बिलासपुर। बिलासपुर में आयोजित अमीन भर्ती परीक्षा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सेंट जेवियर्स हायर सेकेंडरी स्कूल, भरनी में परीक्षा के दौरान एक युवती फ़र्ज़ी प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) लेकर केंद्र में पहुँची और जांच के दौरान पकड़ी गई। यह मामला इतना संगीन था कि परीक्षा केंद्राध्यक्ष ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि युवती को यह फर्जी प्रवेश पत्र एक व्यक्ति ने तैयार कर दिया था, जिससे यह पूरा प्रकरण “मुन्ना भाई और मुन्नी बहन” स्टाइल फर्जीवाड़ा का प्रतीक बन गया।

परीक्षा केंद्राध्यक्ष और स्कूल के प्रिंसिपल विभूति भूषण महाता (58) की शिकायत के अनुसार, घटना रविवार सुबह करीब 11:30 बजे हुई जब प्रवेश पत्रों की नियमित जांच चल रही थी। जांच के दौरान पता चला कि एक ही रोल नंबर वाले दो परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचे हैं। एक तरफ कमलेश्वरी पिता खेलन सिंह थी, जिसका नाम उपस्थिति पत्रक में पंजीकृत था और उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। वहीं दूसरी तरफ अंजली राज पिता श्यामलाल नामक युवती भी उसी रोल नंबर का प्रवेश पत्र लेकर उपस्थित थी, लेकिन उसका नाम रिकॉर्ड में कहीं दर्ज नहीं था।

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केंद्राध्यक्ष द्वारा पूछताछ करने पर अंजली राज कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दे सकी और उसकी परेशान प्रतिक्रिया से शक और गहरा गया। मामले की सूचना तत्काल जिला समन्वयक व्यापमं डीपी साहू को दी गई। साहू ने व्यापमं के डेटाबेस की जांच कर यह स्पष्ट कर दिया कि अंजली राज नाम की कोई परीक्षार्थी अमीन परीक्षा में पंजीकृत ही नहीं थी। इससे साफ हो गया कि प्रवेश पत्र पूरी तरह फर्जी है।

आगे की जांच नोडल अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर शिव कुमार कंवर ने की। बयान दर्ज करते समय अंजली राज ने स्वीकार किया कि ग्राम कर्रानारा निवासी मोहन उईके ने उसके लिए यह फर्जी प्रवेश पत्र तैयार किया था और उसी के कहने पर वह परीक्षा देने पहुंची थी। यह स्वीकारोक्ति पूरे मामले की जड़ तक जाने में महत्वपूर्ण साबित हुई। केंद्राध्यक्ष ने इस कृत्य को छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम 2008 की धारा 3 तथा बीएनएस की अन्य संबंधित धाराओं के तहत गंभीर अपराध बताया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली है और मोहन उईके सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी है।

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यह मामला न केवल परीक्षाओं में होने वाले फर्जीवाड़े की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि इस बात की भी ओर इशारा करता है कि अगर सतर्कता न बरती जाए तो किस प्रकार संगठित स्तर पर फर्जी उम्मीदवारों के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सकता है। सकरी पुलिस की जांच से उम्मीद है कि इस कांड में शामिल प्रत्येक व्यक्ति तक कानून की पकड़ पहुँचेगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।


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