मेडिकल बिल जारी करने के वह में उगाही का खेल; सोशल मीडिया में वायरल हो था आडियो
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अंतर्गत बिल्हा बीईओ कार्यालय में मेडिकल बिल के नाम पर जमकर वसूली चल रही है। मस्तूरी बीईओ कार्यालय के एक बाबू ने शिक्षक से मेडिकल बिल पास करने के एवज में रुपये की मांग की थी। आडियो वायरल हुआ था। ऐसा ही एक आडियो बिल्हा बीईओ कार्यालय के दो कर्मचारियों के बीतचीत का हुआ है। आडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर तेजी के साथ वायरल हो रहा है। बातचीत में साफ सुनाई दे रहा है कि मेडिकल बिल पास करने के एवज में घुसखोरी की बात कही जा रही है। रुपये ना देने पर फाइल ना देने की बात भी सुनाई दे रही है।

बिल्हा विकासखंड शिक्षा कार्यालय में भ्रष्टाचार का खेल जमकर खेला जा रहा है । मेडिकल बिल के नाम पर हो रही लूट की बानगी यह है कि जिन कर्मचारियों द्वारा चढ़ावा नहीं चढ़ाया जा रहा है उनके बिल को गायब कर दिया जा रहा है और जो चढ़ावा दे रहे हैं उनका फर्जी बिल भी पास हो जा रहा है ।

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आज से कुछ महीने पहले ही इस बात का खुलासा हुआ था कि शिक्षक साधे लाल पटेल ने अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम पर 30 लाख का फर्जी मेडिकल बिल निकलवा लिया था जिसमें FIR करने के भी निर्देश हुए थे। अचरज की बात ये कि इस मामले में आजतलक FIR नहीं हुआ है। चर्चा तो इस बात की भी हो रही है कि कुछ अफसरों ने दोषियों को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जिला चिकित्सालय ने पत्र लिखकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को यह स्पष्ट किया था कि पूरा बिल फर्जी है और फर्जी सील और साइन के जरिए कूट रचना करके पूरा खेल खेला गया है ।

अब इसी बिल्हा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से एक ऑडियो वायरल हुआ है जिसमें दो कर्मचारी बात करते हुए सुनाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह कर्मचारी अनुपम शुक्ला और शिल्पा शर्मा है जिन पर मेडिकल बिल शाखा की जिम्मेदारी है । वायरल ऑडियो में अनुपम शुक्ला, शिल्पा शर्मा से कह रहे हैं कि अर्चना मिश्रा फोन करेगी तो कहना कि मेडिकल बिल नहीं मिला है , मैं उससे बात किया था तो वह कह रही थी कि सीएमओ में 10 हजार दी है , इधर ऑफिस में 10 हजार दे दी तो हम लोग क्या मूर्ख हैं जो खोज कर उसका बिल बनाकर भेजेंगे और डीईओ ऑफिस से आवंटन लेकर आएंगे। पैसा लेकर भाग जाएगी । पूछेगी तो बोलना कि मेरे को नहीं मालूम।

इस मामले की लिखित शिकायत देवरीखुर्द की प्रधान पाठक अर्चना मिश्रा ने कार्यालय में भी की है कि उनके बिल को जो 80 हजार रुपये का है फाइल दबा दी गई है। ना तो उसकी पावती दी जा रही है और ना ही उसकी फाइल । धनुहारपारा के सहायक शिक्षक दीपक राव ने भी अपना 50 हजार रुपये का मेडिकल बिल मई माह में कार्यालय में दिया था जिस पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई है । इसका सीधा मतलब है कि जो लोग चढ़ावा देने से इनकार कर रहे हैं उनकी फाइल गायब कर दी जा रही है और जो पैसा दे रहे हैं उनके फर्जी बिलों को भी पास किया जा रहा है और इस खेल में पूरी मिली भगत कार्यालय के कर्मचारियों की है जिस पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है ।

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गौरतलब है कि वायरल ऑडियो में शामिल अनुपम शुक्ला इससे पहले भरारी स्कूल में पदस्थ थे और इसी प्रकार के कारनामे के आरोप में जांच में दोषी साबित हुए थे जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें कोटा विकासखंड में बहाल किया गया। इस साल उन्हें विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा में पदस्थ कर दिया गया है। इस संबंध में डीईओ विजय तांडे का कहना है कि शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।


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