राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। CGVSK मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन अटेंडेंस को साइबर सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा बताते हुए शासकीय संसाधन उपलब्ध कराने की मांग करना एक शिक्षिका को भारी पड़ गया। विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने इसे शासन के आदेशों के खिलाफ, अन्य कर्मचारियों को भड़काने वाला और अनुशासनहीन आचरण मानते हुए संबंधित शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पूरा मामला राजनांदगांव विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला क्रमांक–6, इंग्नाइट गंजपारा स्कूल, संकुल गजपारा से जुड़ा है। यहां पदस्थ सहायक शिक्षिका पूनम सिंह को CGVSK एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के मामले में नोटिस थमाया गया है। शिक्षा विभाग द्वारा सभी शिक्षकों के लिए CGVSK एप के जरिए ऑनलाइन अटेंडेंस अनिवार्य की गई है, जो विद्यालय परिसर के 100 मीटर के दायरे में ही कार्य करता है।
Also Read – धान खरीदी में अनियमितता बरतने के आरोप में समिति प्रबंधक पर एफआईआर
सहायक शिक्षिका पूनम सिंह ने इस व्यवस्था को लेकर विभाग को एक लिखित पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया था। पत्र में शिक्षिका ने बताया कि उनका मोबाइल फोन पुरानी तकनीक का है, जिसके कारण उसमें CGVSK एप डाउनलोड नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके निजी मोबाइल में पारिवारिक तस्वीरें, बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां मौजूद हैं। ऐसे में किसी सरकारी एप को पूर्ण एक्सेस देना साइबर फ्रॉड, डेटा चोरी, डीप फेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग जैसी आशंकाओं को जन्म दे सकता है।
शिक्षिका ने यह भी स्पष्ट किया था कि उनके पास शासकीय कार्य के लिए कोई सरकारी मोबाइल, टैबलेट या बायोमेट्रिक डिवाइस उपलब्ध नहीं है, जिससे वे सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा सकें। इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने विभाग से निवेदन किया था कि ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए आधिकारिक मोबाइल या टैबलेट तथा सिम उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे शासन के निर्देशों का विधिवत पालन कर सकें। साथ ही संसाधन उपलब्ध होने तक मैनुअल उपस्थिति पंजी के माध्यम से अटेंडेंस दर्ज करने की अनुमति देने का आग्रह भी किया था।
हालांकि शिक्षा विभाग ने शिक्षिका के इस पत्र को विभागीय नियमों और शासन के आदेशों के विरुद्ध माना है। जारी नोटिस में कहा गया है कि इस तरह की मांग और टिप्पणियां शासन के निर्देशों का पालन न करने की श्रेणी में आती हैं और अन्य कर्मचारियों को भ्रमित या भड़काने जैसा आचरण दर्शाती हैं। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि CGVSK एप को शासन द्वारा सुरक्षित और आधुनिक तकनीक के तहत विकसित किया गया है, ऐसे में इसे असुरक्षित या साइबर खतरा बताना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की अवहेलना है।
Also Read – ज्यूडिशियल अफसरों के तबादले: हाई कोर्ट ने जारी किया तबादला आदेश
बीईओ द्वारा जारी नोटिस में यह भी कहा गया है कि शासकीय संसाधन उपलब्ध कराने की मांग नियमों के अनुरूप नहीं है और यह अतिरिक्त सुविधाएं प्राप्त करने की मंशा को दर्शाता है। विभाग के अनुसार यह आचरण कर्तव्य के प्रति उदासीनता, लापरवाही और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम–3 का उल्लंघन है। शिक्षिका को तीन दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इधर, ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का पहले से विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों में इस नोटिस के बाद असंतोष और बढ़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विवाद और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।








