रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देश पर राज्य के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए VSK (विद्या समीक्षा केंद्र) मोबाइल एप के जरिए ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि अब वेतन का निर्धारण भी ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर ही किया जाएगा। यानी जितनी हाजिरी, उतनी सैलरी। इसके बावजूद प्रदेश में ऑनलाइन अटेंडेंस की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
राज्य स्तर पर जारी आंकड़े बताते हैं कि कुल 1,77,611 शिक्षकों में से 71 प्रतिशत ने VSK ऐप डाउनलोड कर लिया है, लेकिन सिर्फ 24 प्रतिशत शिक्षक ही नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। यानी बहुसंख्यक शिक्षक ऐप डाउनलोड करने के बाद भी अटेंडेंस लगाने से कतरा रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम फिलहाल जमीन पर सफल नहीं हो पाया है। न्यायधानी बिलासपुर की स्थिति और भी खराब है। जिले के 8,686 शिक्षकों में से सिर्फ 47 प्रतिशत ने ही VSK ऐप में पंजीयन कराया है, जबकि पंजीकृत शिक्षकों में से मात्र 6 प्रतिशत शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस लगा रहे हैं। वहीं मुंगेली जिले की हालत सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है, जहां केवल 2 प्रतिशत शिक्षक ही VSK ऐप से उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं।
इन जिलों में हालात सबसे खराब, डेडलाइन खत्म होने के बावजूद गतिरोध बरकरार
जिलावार रिपोर्ट के अनुसार मुंगेली, सक्ती, गरियाबंद, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, कवर्धा, बेमेतरा और बलौदाबाजार-भाटापारा जैसे जिलों में 10 प्रतिशत से भी कम शिक्षक VSK ऐप के माध्यम से हाजिरी लगा रहे हैं। इन जिलों में ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर हालात बेहद निराशाजनक बने हुए हैं। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर तीन दिनों के भीतर सभी शिक्षकों का पंजीयन और ऑनलाइन अटेंडेंस सुनिश्चित करने को कहा है। हालांकि तय समयसीमा समाप्त होने के बावजूद भी स्थिति में खास सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
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28 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 की बैठक और 5 जनवरी 2026 को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि राज्य के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति VSK एप के माध्यम से ही ली जाएगी। इसके लिए 15 जनवरी 2026 तक सभी शिक्षकों का पंजीयन अनिवार्य किया गया था, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हो सका। ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर शिक्षक संगठनों और शासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि मोबाइल उनका निजी संसाधन है और उस पर उपस्थिति दर्ज कराना निजता का उल्लंघन है। यदि शासन को बायोमेट्रिक उपस्थिति लेनी है तो स्कूलों में मशीन और नेटवर्क की व्यवस्था की जाए। फिलहाल VSK ऐप को लेकर बना गतिरोध शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है।








