रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग में निलंबन और बहाली को लेकर एक बार फिर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिन मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को गंभीर गड़बड़ियों और आरोपों के चलते राज्य सरकार ने निलंबित किया था, उनमें से चार को निलंबन से बहाल करते हुए दोबारा सीएमओ की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। हैरानी की बात यह है कि इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी जारी रहेगी और वे जांच के दौरान ही “मलाईदार कुर्सी” पर बने रहेंगे।
विभाग के इस फैसले ने अफसरों और कर्मचारियों के बीच तीखी चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब आरोप इतने गंभीर थे कि निलंबन जरूरी समझा गया, तो जांच पूरी होने से पहले ही उसी पद पर बहाली कैसे और क्यों कर दी गई। विभागीय जांच चलने के बावजूद संवेदनशील पदों पर दोबारा पदस्थापना को लेकर अब प्रशासनिक हलकों में भी असमंजस की स्थिति है।
निलंबन के बाद फिर उसी पद पर बहाली
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, जिन अधिकारियों को निलंबन से बहाल किया गया है, उन्हें “प्रशासनिक दृष्टि से” पुनः मुख्य नगर पालिका अधिकारी या समकक्ष पदों पर अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है। सभी मामलों में यह भी उल्लेख किया गया है कि इनके विरुद्ध विभागीय जांच जारी रहेगी और निलंबन अवधि का निराकरण जांच के अंतिम निष्कर्ष के आधार पर अलग से किया जाएगा।
बहाल किए गए अधिकारी और नई पदस्थापना
राज्य शासन द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक—
• टामसन रात्रे को निलंबन से बहाल कर मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद नवागढ़ (बेमेतरा) में पदस्थ किया गया है।
• बसंत बुनकर को मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत तमनार (रायगढ़) की जिम्मेदारी दी गई है।
• अनुभव सिंह को नगर पंचायत मल्हार (बिलासपुर) में मुख्य नगर पालिका अधिकारी बनाया गया है।
• कोमल ठाकुर को नगर पंचायत गुंडरदेही (बालोद) में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद पर बहाल किया गया है।
इसके अलावा,
• मुक्ता सिंह चौहान (राजस्व उप निरीक्षक) को नगर पंचायत खोंगापानी में,
• सौरभ तिवारी (सहायक वर्ग-2) को संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास, क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर में,
• श्रीनिवास द्विवेदी (स्वास्थ्य निरीक्षक) को नगर पालिका परिषद कवर्धा में बहाल किया गया है।








