BREAKING: पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त अंतरिम जमानत, जेल से रिहा होते ही छोड़ना पड़ेगा छत्तीसगढ़

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दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाले में करीब 378 दिनों से जेल में बंद रहे पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की है। घोटाले में कथित भूमिका के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए गए लखमा को राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि जेल से बाहर आते ही उन्हें छत्तीसगढ़ छोड़ना होगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जमानत अवधि के दौरान वे राज्य के बाहर ही निवास करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत के साथ कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। आदेश के अनुसार, रिहाई के बाद कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। यदि उनके पास पासपोर्ट है तो उसे संबंधित प्राधिकरण के समक्ष जमा करना अनिवार्य होगा। जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें पेश होना पड़ेगा। साथ ही, जिस थाने के क्षेत्र में वे निवास करेंगे, वहां अपना सक्रिय मोबाइल नंबर और संपर्क विवरण दर्ज कराना होगा। याचिका की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता परगनिहा ने लखमा की ओर से पक्ष रखा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में लगभग ढाई घंटे तक सुनवाई हुई।

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने 15 जनवरी 2025 को शराब घोटाले में संलिप्तता के आरोप में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें सात दिनों की ईडी रिमांड पर रखा गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। इसके पश्चात 21 जनवरी से 4 फरवरी तक उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। करीब दो महीने पहले कांग्रेस पार्टी ने जेल में बंद लखमा के इलाज में लापरवाही का आरोप भी लगाया था।

शराब सिंडिकेट में प्रमुख भूमिका का आरोप

ईडी का आरोप है कि कोंटा विधानसभा क्षेत्र के विधायक और तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा शराब घोटाले के सिंडिकेट के अहम हिस्से थे। एजेंसी के अनुसार, उनके निर्देशों पर ही पूरा सिंडिकेट संचालित होता था और उन्हें लगातार संरक्षण मिलता रहा। आबकारी मंत्री के रूप में रहते हुए लखमा ने राज्य की शराब नीति में बड़े बदलाव किए, जिनमें FL-10 लाइसेंस की शुरुआत भी शामिल है। ईडी का दावा है कि विभाग में हो रही अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले से छत्तीसगढ़ सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की, जिसमें नेताओं, कारोबारियों और अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है।


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