Bilaspur High Court: नोटिस विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, सरपंच को अब अविश्वास प्रस्ताव का करना होगा सामना

Share on

Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायत तुरमा की सरपंच फुलेश्वरी बंजारे को बड़ा झटका दिया है। डिवीजन बेंच ने उनके खिलाफ लाई गई अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई को रद्द करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सरपंच को अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। जस्टिस बीडी गुरु और जस्टिस एनके चंद्रवंशी की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि नोटिस अवधि से जुड़ी त्रुटि पहले ही न्यायिक हस्तक्षेप से दूर कर दी गई थी, इसलिए पूरी कार्रवाई रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता।

पढ़िए क्या है मामला?

ग्राम पंचायत तुरमा की निर्वाचित सरपंच फुलेश्वरी बंजारे ने अपने खिलाफ पंचों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने 25 अप्रैल 2025 को सरपंच पद का कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बाद 15 मई 2026 को कुछ पंचों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू की। 20 मई 2026 को बैठक का नोटिस जारी किया गया, जिसमें 29 मई 2026 को अविश्वास प्रस्ताव पर विचार करने की तिथि तय की गई थी। हालांकि नोटिस उन्हें 24 मई 2026 को प्राप्त हुआ।

नोटिस अवधि को लेकर उठाया था सवाल

सरपंच की ओर से दलील दी गई कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत सात दिन का नोटिस देना अनिवार्य है, लेकिन उन्हें निर्धारित अवधि से कम समय में नोटिस दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े जरूरी दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे उन्हें गंभीर नुकसान हुआ।

सिंगल बेंच ने क्या कहा था?

मामले की पहली सुनवाई में सिंगल बेंच ने माना था कि प्रथम दृष्टया सात दिन की नोटिस अवधि पूरी नहीं हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने कलेक्टर बलौदाबाजार-भाटापारा को निर्देश दिया था कि प्रस्तावित बैठक दो दिन के लिए स्थगित की जाए और सात दिन की अवधि पूरी होने के बाद ही बैठक आयोजित की जाए।

डिवीजन बेंच में दी थी चुनौती

सिंगल बेंच के फैसले से असंतुष्ट सरपंच फुलेश्वरी बंजारे ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। उन्होंने कहा कि केवल बैठक स्थगित करना पर्याप्त नहीं था, बल्कि पूरी अविश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया रद्द की जानी चाहिए थी।

राज्य सरकार ने क्या कहा?

राज्य शासन की ओर से पेश लॉ अफसर ने कहा कि सिंगल बेंच ने वैधानिक आवश्यकता का पालन सुनिश्चित करते हुए उचित आदेश पारित किया था। साथ ही यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता स्वयं मूल शिकायत से अवगत थीं, इसलिए दस्तावेज नहीं मिलने से किसी वास्तविक नुकसान का दावा नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि सिंगल बेंच ने सात दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद बैठक आयोजित करने का निर्देश देकर त्रुटि को पहले ही सुधार दिया था।

कोर्ट ने कहा—

  • याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाईं कि अब भी उन्हें कोई वास्तविक नुकसान है
  • दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने को लेकर कोई ठोस तथ्य पेश नहीं किया गया
  • केवल पूर्वाग्रह का आरोप लोकतांत्रिक प्रक्रिया को रद्द करने का आधार नहीं बन सकता

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस सबूत के अविश्वास प्रस्ताव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज कर दी।


Share on
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!