Bilaspur High Court: बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षक ने खुद की पैरवी, हाई कोर्ट ने JD दुर्ग को दिया बड़ा निर्देश

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CG High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया, जहां एक शिक्षक ने अपने तबादले की मांग को लेकर खुद ही हाई कोर्ट में याचिका दायर की और अपने मामले की पैरवी भी स्वयं की। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने संयुक्त संचालक (जेडी) स्कूल शिक्षा संभाग दुर्ग को शिक्षक के आवेदन पर 45 दिनों के भीतर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

पढ़िए क्या है मामला?

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में पदस्थ व्याख्याता गया राम दुबे ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्थानांतरण की मांग की थी। मामले की सुनवाई जस्टिस एनके चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता शिक्षक ने कोर्ट को बताया कि 7 जून 2025 को जारी शासन आदेश के तहत उनका तबादला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुमुदकट्टा, जिला बालोद से हाई स्कूल मरकेली, ब्लॉक मानपुर, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी कर दिया गया था। वह पिछले एक वर्ष से वहां पदस्थ हैं।

बच्चों की पढ़ाई बनी तबादले की वजह

शिक्षक ने कोर्ट को बताया कि उनके बच्चे भिलाई में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान पदस्थापना स्थल मरकेली से भिलाई की दूरी लगभग 150 किलोमीटर है। उन्होंने कहा कि बच्चों की देखरेख करने वाला परिवार में उनके अलावा कोई दूसरा सदस्य नहीं है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालना मुश्किल हो रहा है।

पहले विभाग को दिया था आवेदन

याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा संभाग दुर्ग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर बालोद या दुर्ग जिले के किसी स्कूल में स्थानांतरण की मांग की थी। लेकिन दो महीने बीत जाने के बावजूद विभाग ने आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया, जिसके बाद उन्हें हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

राज्य सरकार ने नहीं किया विरोध

राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजकुमार गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने शिक्षक की मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एनके चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा संभाग दुर्ग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा 1 अप्रैल 2026 को दिए गए अभ्यावेदन पर आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।


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