बिलासपुर नगर निगम के आदेश को किया रद्द, याचिकाकर्ताओं को नौकरी में रखने जारी किया सशर्त आदेश

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बिलासपुर। अनुकंपा नियुक्ति को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और राहत देने वाला फैसला सुनाया है। नगर निगम कमिश्नर द्वारा अनुकंपा नियुक्ति को रद्द करने के आदेश को हाई कोर्ट ने अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ताओं को पुनः नौकरी में रखने का सशर्त निर्देश दिया है।

जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच ने कहा कि इस मामले में अधिकारियों की मनमानी, निरंकुशता और विवेकहीनता साफ झलकती है, जिसके कारण वैध दावों को गलत तरीके से खारिज किया गया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अफसरों द्वारा दाखिल हलफनामे में निर्णय रद्द करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया यह प्रशासनिक अनुशासन के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने जिस आदेश को रद्द किया है, वह बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर का 11 सितंबर 2025 का आदेश था, जिसके तहत 10 जनवरी 2025 की अनुकंपा नियुक्तियों को ‘‘राज्य शासन की अनुमति न होने’’ के आधार पर निरस्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ प्रभावित कर्मचारियों ने याचिका दायर की थी, जिनकी पैरवी अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह ने की।

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हाई कोर्ट की कठोर टिप्पणी “अधिकारियों की मनमानी स्पष्ट”

कोर्ट ने अपने फैसले में सख्त शब्दों में कहा

•   निदेशक द्वारा दायर हलफनामे में कोई कारण नहीं बताया गया, इससे निर्णय की मनमानी झलकती है।
•   अनुकंपा नियुक्ति पर विचार राज्य सरकार की 14 जून 2013 की नीति के अनुसार होना चाहिए।
•   अदालत इस नीति में कोई शब्द जोड़ या घटा नहीं सकती प्रशासन को नीति का पालन करना ही होगा।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदन समय सीमा के भीतर प्रस्तुत किया गया था, इसलिए मामले को धारा 16 के तहत अस्वीकृत करना ‘‘पूरी तरह गलत और विवेकहीन’’ था।

2013 की नीति, कोर्ट ने समझाया असली अर्थ

धारा 15(4) और 16 केवल उन मामलों पर लागू होती है, जहां

•   परिवार में नियुक्ति हेतु कोई पात्र वयस्क सदस्य न हो,
•   और समय सीमा 3 वर्ष (विशेष परिस्थितियों में 5 वर्ष) लागू हो।

लेकिन याचिकाकर्ताओं ने समय पर आवेदन कर दिया था, इसलिए नगर निगम द्वारा ‘‘अनुमोदन न होने’’ का आधार पूरी तरह अवैध माना गया।

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हाई कोर्ट का आदेश, पुनः नियुक्ति, लेकिन बिना पिछला वेतन

जस्टिस एनके व्यास ने फैसला सुनाते हुए कहा

•   विवादित आदेश (9 सितंबर 2025) रद्द किया जाता है।
•   याचिकाकर्ताओं को चपरासी के पद पर पुनः नियुक्त किया जाए।
•   वे पिछले वेतन के हकदार नहीं होंगे।
•   लेकिन उनकी वरिष्ठता उनकी मूल नियुक्ति तिथि से ही गिनी जाएगी और कोई ‘‘सेवा अंतराल’’ नहीं माना जाएगा।

याचिका को उपरोक्त निर्देशों के साथ स्वीकृत किया गया।

किन कर्मचारियों को मिली राहत?

हाई कोर्ट द्वारा राहत प्राप्त करने वालों में शामिल हैं

•   नीता ठाकुर (चपरासी)
•   अन्नपूर्णा (चपरासी)
•   बमो. यूनुस (चपरासी)
•   गीता श्रीवास (चपरासी)
•   मीना पाल (चपरासी)
•   हसीना बानो (चपरासी)
•   प्रदीप बघेल (चपरासी)
•   शेख अमीन उल्लाह (चपरासी)
•   रजनी गुप्ता (चपरासी)
•   मो. यूनुस खान (चपरासी)


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