बिलासपुर। बिलासपुर के चर्चित निजी शिक्षण संस्थान ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल की दो शाखाओं की मान्यता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। व्यापार विहार और मिशन रोड स्थित ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल की मान्यता जांच में फर्जी पाई गई है। इस कारण इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित कक्षा पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे।
सीबीएसई के नाम पर संचालन का आरोप
जानकारी के अनुसार कई निजी स्कूल सीबीएसई संबद्धता का बोर्ड लगाकर अभिभावकों से मोटी फीस वसूल रहे हैं, जबकि उनके पास वास्तविक मान्यता राज्य शिक्षा विभाग की होती है। ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल के मामले में भी ऐसा ही आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई कराने का दावा करता रहा, जबकि दोनों शाखाएं जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कक्षा आठवीं तक राज्य शासन की मान्यता प्राप्त स्कूल के रूप में संचालित हैं।
परीक्षा विकल्प मांगने से खुला मामला
यह मामला उस समय सामने आया जब स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से 16 मार्च से शुरू होने वाली कक्षा पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के संबंध में विकल्प मांगा। इससे अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पूरे साल सीबीएसई पैटर्न के अनुसार पढ़ाया गया, ऐसे में उन्हें अचानक राज्य बोर्ड की परीक्षा में बैठाने की बात समझ से परे है।
एक मान्यता पर दो स्कूल चलाने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि एक ही मान्यता के आधार पर दो अलग-अलग स्कूल संचालित किए जा रहे थे। यह व्यवस्था वर्षों से जारी थी, लेकिन इसका खुलासा तब हुआ जब राज्य शासन ने पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा में सरकारी और निजी स्कूलों के छात्रों की अनिवार्य भागीदारी का निर्देश जारी किया। इन दोनों स्कूलों में कक्षा पांचवीं और आठवीं में लगभग 250 से 300 छात्र अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण इन छात्रों का भविष्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
अभिभावकों में नाराजगी
अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों ने पहले ही स्कूल स्तर पर परीक्षा दे दी है। इसके बावजूद अब उन्हें दोबारा परीक्षा में बैठने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने बच्चों का प्रवेश सीबीएसई पैटर्न पर संचालित स्कूल में कराया था। ऐसे में अचानक राज्य बोर्ड परीक्षा में शामिल करने का निर्णय अभिभावकों और छात्रों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
कलेक्टर को शिकायत, जांच शुरू
मामले की शिकायत कलेक्टर बिलासपुर तक पहुंचने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच दल गठित कर स्कूलों की जांच कराई। जांच में पाया गया कि विद्यालय संचालन मान्यता की शर्तों के विपरीत किया जा रहा था। इसके बाद दोनों स्कूलों की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की गई है।
वैकल्पिक परीक्षा की मांग
सूत्रों के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष माफी मांगते हुए छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के लिए वैकल्पिक अवसर देने का अनुरोध किया है। बताया जा रहा है कि पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों को अनुत्तीर्ण घोषित करने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में जून-जुलाई में आयोजित होने वाली पूरक परीक्षा में लगभग 300 छात्रों को शामिल कराने का विकल्प विचाराधीन है।
शिक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि वर्षों से स्कूल का संचालन होने के बावजूद मान्यता संबंधी अनियमितताओं का पता पहले क्यों नहीं चल पाया। यदि राज्य शासन ने पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षा में निजी स्कूलों की अनिवार्य भागीदारी का निर्देश जारी नहीं किया होता, तो संभवतः यह मामला सामने नहीं आता।
अन्य स्कूल में भी अनियमितता का आरोप
इसी तरह का एक मामला नेहरू नगर स्थित नारायण टेक्नोक्रेट्स स्कूल में भी सामने आया है, जहां बिना मान्यता के पूरे सत्र में सीबीएसई के नाम पर पढ़ाई कराने का आरोप है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन द्वारा जल्दबाजी में राज्य बोर्ड की मान्यता लेने की बात कही जा रही है।








