छतीसगढ़ शिक्षक संघ ने CM व स्कूल शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, हस्तक्षेप की मांग

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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग ने नियमित शिक्षकों को छोड़कर शिक्षक एलबी का डीपीसी कराया और पदोन्नति सूची जारी कर दी है। विभाग के अधिकारियों के अड़ियल रवैये और नियम व प्रावधानों के विपरीत काम करने को लेकर अब छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री व स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर पदोन्नति पर रोक लगाने व नियमित व शिक्षक एलबी का संयुक्त डीपीसी के बाद पदोन्नति सूची जारी करने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र लिखकर विभागीय अफसरों के अड़ियल रवैये पर नाराजगी जताई है। संघ ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि डीपीआई के अधिकारी से इस संबंध में चर्चा की गई थी। चर्चा के बाद अधिकारी ने आश्वासन भी दिया था। अचरज की बात ये कि अफसर द्वारा आश्वासन देने के कुछ ही घंटों बाद पदोन्नति सूची जारी कर दी। संघ ने अपने पत्र में लिखा है कि नियमों की अवहेलना कर वर्ग विशेष को पदोन्नति प्रदान करने एवं जानबूझकर शिक्षा विभाग में अराजकता फैलाने के कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। संघ ने सीएम व विभागीय मंत्री से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर जारी पदोन्नति सूची को रोकने की मांग की है।

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छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने अपने पत्र में यह सब लिखा

शिक्षक व प्रधान पाठक ई संवर्ग की घोर उपेक्षा करके 26 दिसंबर.2025 को केवल शिक्षक एलबी. संवर्ग से व्याख्याता पदोन्नति की गई है। शिक्षक व प्रधान पाठक ई संवर्ग को, वरिष्ठों की उपेक्षा पूरी तरह अनुचित व असंवैधानिक है। स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती पदोन्नति अधिनियम (राजपत्र मार्च 2019) का उल्लंघन है। साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र व निर्देश के विपरीत है।

22 दिसंबर 2025 को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में केवल शिक्षक एलबी. संवर्ग से व्याख्याता पदोन्नति हेतु नियम विरूद्ध डीपीसी के उपरान्त छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल द्वारा (पत्र क्रमांक 119 24 दिसंबर 2025) आशुतोष चवरे, उपसंचालक लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ को उपरोक्त विसंगतियों की ओर ध्यानाकृष्ट कराकर शीघ्र निराकरण की मांग रखी गई थी। उपसंचालक के आश्वासन के बाद भी उपरोक्त नियम विरूद्ध, असंवैधानिक पदोन्नति सूची वार्ता के दो दिन बाद ही उपसंचालक द्वारा ही हस्ताक्षरित आदेश 26 दिसंबर 2025 को निकाल दी गई है। जिसके कारण प्रदेश के शिक्षकों व प्रधान पाठकों ई संवर्ग में घोर आक्रोश व्याप्त है। निवेदन है कि शिक्षक एलबी संवर्ग से व्याख्याता के नियम विरुद्ध पदोन्नति को तत्काल हस्तक्षेप कर निरस्त कराते हुए शिक्षक व प्रधान पाठक ई संवर्ग तथा शिक्षक व प्रधान पाठक एलबी. संवर्ग की संयुक्त डीपीसी. के जरिए दोनों संवर्गो के पात्र शिक्षकों को नियमानुसार पदोन्नति प्रदान की जाए।

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नियमित शिक्षकों को पदोन्नति से दिखाया बाहर का रास्ता

यह एक सामान्य प्रक्रिया है कि जब कभी किसी बड़े मामले में राज्य सरकार की हार होती है तो वह इसके विरुद्ध डिवीजन बेंच या सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख करता है। कमोबेश याचिकाकर्ता कर्मचारी भी यही करते हैं। व्याख्याता प्रमोशन मामले में नियमित शिक्षकों से हारने के बाद डीपीआई ने महाधिवक्ता को महज एक पत्र लिखकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। यह पत्र बताता है कि कैसे नियमित शिक्षकों का केस व्याख्याता प्रमोशन मामले में अड़ंगा बन कर खड़ा हुआ था।

दरअसल रायपुर के ओंकार प्रसाद वर्मा और अन्य शिक्षकों ने हाई कोर्ट में खुद की वरिष्ठता प्रभावित किए जाने वाले मामले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। जिसका मूल तथ्य यह था कि रायपुर से बलौदा बाजार जिला जब अलग हुआ तो उन्होंने अपने पुराने जिले रायपुर में रहने के नाम पर अपना स्थानांतरण रायपुर जिले के शालाओं में ले लिया। इसी बात को लेकर उनकी वरिष्ठता जो की 2010 की थी, को 2018 से गिना गया। इसके खिलाफ ओंकार प्रसाद वर्मा और अन्य शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

इसके विरुद्ध कुछ अन्य शिक्षकों ने हस्तक्षेप याचिका भी दायर की थी। 2021 में दायर केस का अंतिम निर्णय फरवरी 2025 में आया। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में निर्णय दिया और कहा कि उनकी वरिष्ठता उनके प्रधान पाठक पद पर नियुक्ति दिनांक से ही गिनी जाए और समस्त लाभ उन्हें उसी तिथि से दिया जाए। साथ ही कोर्ट ने वरिष्ठता सूची को गलत मानते हुए उसमें सुधार करने के संबंध में राज्य सरकार को निर्देश जारी किया था। हाई कोर्ट के निर्णय के बाद विभाग ने इस याचिका को डिवीजन बेंच में चुनौती देने का निर्णय लिया लेकिन यह निर्णय केवल कागज तक सीमित रहा। विभाग ने महाधिवक्ता को एक पत्र लिखकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। मार्च में लिखे इस पत्र के बाद दिसंबर तक विभाग ने किसी प्रकार की कोई याचिका दायर ही नहीं की।

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आनन फानन में प्रमोशन का फैसला, समझ से परे

हाई कोर्ट से मामला हारने के बाद जिस याचिका को चुनौती देनी थी उसे विभाग ने चुनौती नहीं दी, गई बल्कि अचानक से नियमित शिक्षकों को पदोन्नति से बाहर कर, शिक्षक एलबी के प्रमोशन की सूची जारी करने का निर्णय लिया। तमाम विरोधों के बावजूद आदेश भी जारी कर दिया है। सरकार का दावा जीरो टॉलरेंस का है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग की कहानी कुछ और ही है । विभाग के ही पत्र, विभाग के खेल का भंडाफोड़ कर रहे हैं । बताते हैं कि विभाग के अधिकारी ने ही प्रमोशन का खेला कर दिया है। आला अफसरों को यह विश्वास दिलाया कि इस तरीके से प्रमोशन किया जा सकता है और इससे किसी भी प्रकार की कोई रुकावट नहीं आएगी।

न्यायालयीन आदेश की अवहेलना तो नहीं, अवमानना के दायरे में तो नहीं आएंगे अफसर

स्वाभाविक बात है कि इस आदेश से नियमित शिक्षकों को नुकसान होना तय है। जानकारों का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसा कर न्यायालयीन आदेश की अवहेलना कर दी है। विभागीय अफसरों के खिलाफ अवमानना का मामला बनता है। नियमित शिक्षकों का कहना है कि जल्द ही रिटायर होने वाले एक अधिकारी इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे हैं और समय-समय पर जानबूझकर ऐसा खेल खेलते हैं जिससे शिक्षक एलबी और नियमित शिक्षकों के बीच तलवार खींच जाती है । यही नहीं प्रमोशन करते समय बहुत से शिक्षकों का नाम जानबूझकर गायब कर दिया जाता है और फिर धीरे से उनकी सुनवाई करते हुए उनका नाम जोड़ा जाता है और उन्हें प्रमोशन भी दिया जाता है। जिस प्रकार प्राचार्य प्रमोशन में सैकड़ों की संख्या में शिक्षकों को गायब कर दिया गया था और बाद में प्रमोशन दिया गया ठीक वैसा ही खेल सुनियोजित रूप से शिक्षक एलबी की सूची जारी करते समय भी खेला गया है यानी एक तरफ जहां नियमित शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है वहीं शिक्षक एलबी की सूची में भी जानबूझकर गड़बड़ी की गई है।


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