बिलासपुर । बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद एक बार फिर कांग्रेसी दिग्गजों ने संगठन सृजन पर फोकस करना शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का दिल्ली में जमावड़ा, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का प्रांतीय दिग्गजों से वन-टू-वन चर्चा के बाद अब दावा किया जा रहा है कि दिल्ली से कभी भी जिलाध्यक्षों की सूची जारी की जा सकती है। इस चर्चा के बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति एक बार फिर गरमाने लगी है। दावेदारों के अलावा समर्थकों की नजरें दिल्ली की ओर टिक गई है। प्रादेशिक स्तर पर भी अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं।
दिल्ली से मिल रहे संकेतों के बीच प्रादेशिक नेताओं के अलावा दावेदार एक बार फिर उन बातों को रिव्यू कर रहे हैं जो आब्जर्वर ने मुलाकात के दौरान की थी या फिर संगठन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल किए थे। संगठन सृजन को लेकर सबसे महत्वपूर्ण चर्चा इस बात को लेकर चल रही है कि क्या वाकई आब्जर्वर की रिपोर्ट के आधार पर जिलाध्यक्षों का चयन होगा या फिर चुनिंदा नामचीन नेताओं को कोटा मिल जाएगा। कोटा सिस्टम के तहत जिले बांटकर अपनी पसंद पर दिल्ली में मुहर तो नहीं लगवा लिए होंगे। बहरहाल यह सिर्फ चर्चा है। दावा तो यही किया जा रहा है कि आब्जर्वर की रिपोर्ट और दिल्ली की अपनी सर्वे के आधार पर जिला अध्यक्षों की सूची जारी की जाएगी।
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बताया जा रहा है कि रविवार को राहुल गांधीकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें संगठन सृजन को लेकर गहन चर्चा की गई। एआईसीसी की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगेगी। एआईसीसी की बैठक में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत,प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, सह प्रभारी विजय जांगिड़, एसए संपत व जरिता लैतफलांग भी शामिल होंगे।
आब्जर्वर ने सौंप दी है पैनल के साथ रिपोर्ट
संगठन सृजन के तहत दिल्ली से प्रदेश के 41 संगठन जिलों में आब्जर्वर भेजे गए थे। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों, नेताओं, सामाजिक पदाधिकारियों से मिले फीडबैक के आधार पर रिपोर्ट के साथ पैनल सौंप दिया है। बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्षों के पैनल में पांच नामों को शामिल किया गया है।
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बिलासपुर में नए चेहरे की चर्चा
बिलासपुर सहित आधा दर्जन जिलों में नए चेहरे को सामने लाने की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। अगर ऐसा होता है तो संगठन में ढांचागत बदलाव देखने को मिलेगा। चर्चा तो इस बात की भी हो रही है कि नए चेहरे के सामने आने से संगठन में जरुरी बदलाव भी देखने को मिलेगा। गुटीय राजनीति किस रूप में हावी होती है यह भी देखने वाली बात होगी।








