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फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों की नौकरी जाएगी और वेतन की रिकवरी भी होगी, हाई कोर्ट ने दिया आदेश

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प्रयागराज। फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर शिक्षक की नौकरी हथियाने वाले जालसाज शिक्षकों की अब खैर नहीं है। एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश राज्य शासन को दिया है। जांच में जिन शिक्षकों का सर्टिफिकेट फर्जी पाए जाएंगे, बर्खास्तगी के साथ ही वेतन की वसूली भी होगी। हाई कोर्ट ने मिलीभगत में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश सरकार को दिया है। जांच पड़ताल और जरुरी कार्रवाई के लिए कोर्ट ने राज्य सरकार को छह महीने का समय दिया है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने फर्जी प्रमाण पत्राें के सहारे सहायक शिक्षक का नौकरी हथियाने वालों के खिलाफ राज्यभर में अभियान चलाकर व्यापक स्तर पर जांच पड़ताल का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने प्रिंसिपल सिकरेट्री बेसिक शिक्षा को व्यापक स्तर पर जांच पड़ताल कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा, अवैध नियुक्तियों को रद्द करने के साथ ही दिए गए वेतन की रिकवरी भी करनी होगी। जांच पड़ताल के दौरान जिन अफसरों की संलिप्तता उजागर होगी उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। गरिमा सिंह द्वारा दायर याचिका की सुनवाई जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच में हुई। जस्टिस चौहान ने कहा, अधिकारियों की निष्क्रियता न केवल धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा प्रणाली की जड़ों पर भी प्रहार करती है, जिससे स्टूडेंट्स के हितों को गंभीर नुकसान होता है।

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क्या है मामला

देवरिया जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने गरिमा सिंह की नियुक्ति को रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है। आदेश को चुनौती देते हुए गरिमा सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने गरिमा सिंह के शैक्षणिक दस्तावेजों को फर्जी करार देते हुए यह आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ता गरिमा सिंह ने अपनी याचिका में कहा है, जुलाई, 2010 में असिस्टेंट टीचर के रूप में उसकी नियुक्ति की गई थी। नियुक्ति के पूर्व उनके द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की जांच की गई थी।

वर्तमान में उसे नौकरी करते 15 साल हो गए हैं। लंबी अवधि की सेवा के बाद उसे बर्खास्त करना नियम विरुद्ध है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी करने से पहले उसे सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया है। किसी रिश्तेदार की शिकायत के आधार पर उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए विधि अधिकारी ने कहा, अगर नौकरी धोखे वाले डॉक्यूमेंट्स या तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई है तो ऐसे धोखे का फायदा उठाने वाला व्यक्ति उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियम, 1999 के तहत किसी भी जांच की मांग नहीं कर सकता। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने रिट याचिका को खारिज कर दिया है।

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