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हेड मास्टर और लेक्चरर की संयुक्त वरिष्ठता सूची की मांग को लेकर दायर याचिका पर हुई सुनवाई, स्कूल शिक्षा सचिव को हाई कोर्ट का नोटिस,मांगा जवाब

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बिलासपुर। प्रिंसिपल पदोन्नति में हेड मास्टर और लेक्चरर की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी करते हुए पूरे मामले पर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह याचिका शिक्षक आर.के. झा ने अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी के माध्यम से दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2008 में बनाए गए नियमों में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि यदि लेक्चरर उपलब्ध न हों तो हेड मास्टर कैडर से प्रिंसिपल के पद पर पदोन्नति दी जानी चाहिए। लेकिन व्यवहार में ऐसा कभी नहीं हुआ क्योंकि लेक्चरर की संख्या इतनी अधिक रहती थी कि हेड मास्टर्स के प्रमोशन की बारी ही नहीं आई। बाद में 2014 में बनाए गए नियमों से तो हेड मास्टर का प्रावधान ही हटा दिया गया। वर्ष 2019 की नई नीति में 25 प्रतिशत हेड मास्टर्स को प्राचार्य पद पर पदोन्नत करने का प्रावधान जोड़ा गया, लेकिन इसका लाभ केवल उन्हीं हेड मास्टर्स को मिला जो 2011 में योग्यता के अभाव में लेक्चरर नहीं बन पाए थे। दूसरी ओर, जो हेड मास्टर्स 2011 में लेक्चरर बन गए थे, वे वर्तमान नियमों के कारण प्रिंसिपल पद से वंचित रह गए और लेक्चरर कैडर में जूनियर हो गए। इसी असमानता को याचिका में प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया है।

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संयुक्त वरिष्ठता सूची पर विवाद फिर बढ़ा

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि डीपीआई ने पहले हेड मास्टर से लेक्चरर बने शिक्षकों और हेड मास्टर्स की संयुक्त वरिष्ठता सूची बनाने के निर्देश जारी किए थे। निर्देश के अनुसार अक्टूबर में सूची तैयार भी हुई, लेकिन बाद में उसमें से कई नाम हटा दिए गए। संयुक्त वरिष्ठता सूची की मांग को लेकर 2021 से लगातार याचिकाएँ दायर की गईं। हाई कोर्ट ने नियम 15(1) में संशोधन करने का निर्देश भी दिया था और कहा था कि यदि संशोधन नहीं होता, तो पदोन्नति की तिथि से हेड मास्टर की वरिष्ठता तय की जाए। इसी आधार पर मई 2024 में संयुक्त वरिष्ठता सूची जारी की गई। इस सूची का विरोध करते हुए कुछ हेड मास्टर्स ने सिंगल बेंच में याचिका लगाई, जिसके बाद कोर्ट ने सरकार को उनके नामों पर विचार करने का निर्देश दिया। हालाँकि, 29 अक्टूबर 2024 को जारी नई वरिष्ठता सूची में लेक्चरर्स के नाम पूरी तरह हटा दिए गए। इसके विरोध में आर.के. झा सहित अन्य शिक्षकों ने फिर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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हाई कोर्ट ने मांगा जवाब, सचिव को नोटिस जारी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी ने बताया कि कोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद संयुक्त वरिष्ठता सूची से नाम हटाए गए, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दोनों कैडर, हेड मास्टर और लेक्चरर में रहे हैं, इसलिए बिना उनकी सहमति के सूची से नाम हटाना अनुचित है। हाई कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है।


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