कोरबा। कोरबा में एक संवेदनशील मामले की जांच में गंभीर लापरवाही और पीड़िता से अवैध वसूली के आरोप ने पुलिस विभाग को हिला दिया है। मामले में कार्रवाई करते हुए कोरबा एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने महिला एएसआई को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर हुई है जिसमें पीड़िता ने आरोप लगाया कि शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण करने वाले आरोपी को पकड़ने के नाम पर एएसआई ने उससे 20 हजार रुपये की उगाही की और जांच को गंभीरता से नहीं लिया।
पीड़िता ने थाने में आरोपी प्रवीण डहरिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते समय सोशल मीडिया चैट्स, एसएमएस, व्हाट्सऐप और फेसबुक को पेनड्राइव और प्रिंट आउट के रूप में एएसआई को सौंपा था। लेकिन जब मामला अदालत में पहुंचा तो जांच अधिकारी ने इन महत्वपूर्ण सबूतों को कोर्ट के समक्ष पेश ही नहीं किया। बाद में जब पीड़िता इस बारे में एएसआई से पूछताछ करने थाने पहुंची, तो महिला अधिकारी ने उसे डांटकर भगा दिया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एएसआई ने उससे 20 हजार रुपये की मांग की और रकम ले भी ली, फिर भी कार्रवाई नहीं की। इन आरोपों को गंभीर मानते हुए एसपी ने तुरंत एएसआई को निलंबित करने का आदेश जारी किया।

निलंबन आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि पीड़िता की शिकायत में लगाए गए आरोप अत्यंत संवेदनशील और गंभीर प्रकृति के हैं। आदेश में उल्लेख है कि आरोपी के खिलाफ मामला फिलहाल एफ़टीसी कोर्ट में लंबित है और पीड़िता द्वारा जमा किए गए डिजिटल सबूतों को विवेचन में शामिल न करना एएसआई की घोर लापरवाही को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, पीड़िता से गाली-गलौज करने तथा पैसों की उगाही का आरोप भी आदेश में दर्ज किया गया है।
एसपी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि महिला संबंधी अपराधों को गंभीरता से न लेने, अपने पदीय दायित्वों में लापरवाही बरतने और स्वेच्छाचारिता दिखाने के कारण एएसआई की भूमिका संदिग्ध है और प्रथम दृष्टया यह आचरण अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर थाना सिविल लाइन रामपुर में पदस्थ एएसआई अनिता खेस को 5 दिसंबर 2025 की दोपहर से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय रक्षित केंद्र, कोरबा निर्धारित किया गया है, जहां से वे नियमों के अनुसार अपने अनुषांगिक भत्ते प्राप्त करती रहेंगी।
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यह मामला इस बात की तरफ भी इशारा करता है कि महिला संबंधी गंभीर अपराधों की जांच में किसी भी प्रकार की उदासीनता न केवल पीड़िता के लिए न्याय में बाधा बनती है, बल्कि पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करती है। इसलिए एसपी द्वारा की गई कार्रवाई को विभाग के भीतर एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि ऐसी लापरवाही या भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।








