Jaggi Murder Case: सुप्रीम कोर्ट से अमित जोगी को बड़ी राहत

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Jaggi Murder Case: दिल्ली। बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को अंतरिम राहत दी है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा दिए गए तीन सप्ताह में सरेंडर करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। साथ ही मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि CBI का पक्ष सुने बिना मामले में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।

क्या है मामला

एनसीपी नेता स्वर्गीय रामअवतार जग्गी की 4 जून 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे चर्चित आपराधिक मामला माना जाता है। हत्या के मामले में कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को हत्याकांड का मास्टरमाइंड मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हाई कोर्ट ने क्या कहा था

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-B के तहत दोषी मानते हुए:

  • आजीवन कारावास
  • 1,000 रुपये जुर्माना
  • जुर्माना नहीं भरने पर 6 महीने अतिरिक्त कठोर कारावास

साथ ही अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में अमित जोगी की दो याचिकाएं

अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं:

  1. हाई कोर्ट के सरेंडर आदेश पर रोक लगाने की मांग
  2. उम्रकैद की सजा को चुनौती

दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सरेंडर पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि मामले में CBI का जवाब जरूरी है। इसलिए:

  • सरेंडर आदेश पर अंतरिम रोक
  • CBI को नोटिस जारी
  • विस्तृत जवाब मांगा गया

अब अगली सुनवाई में मामले पर आगे विचार होगा।

हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था:

जब सभी आरोपियों पर समान साक्ष्य हों, तो किसी एक आरोपी को अलग राहत नहीं दी जा सकती, जब तक उसके पक्ष में स्वतंत्र और ठोस आधार न हो।

23 साल पुराना मामला

रामअवतार जग्गी छत्तीसगढ़ के प्रमुख कारोबारी और राजनीतिक व्यक्ति थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। NCP में वे कोषाध्यक्ष पद पर भी रहे थे। उनकी हत्या के बाद यह मामला राज्य की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

अब आगे क्या

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरेंडर पर रोक के बाद अमित जोगी को तत्काल राहत मिल गई है। अब पूरे मामले का भविष्य सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और CBI के जवाब पर निर्भर करेगा।


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