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नगर निगम आयुक्त ने प्राइवेट कालोनी की 19 एकड़ जमीन को राजसात कर है.

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बिलासपुर | बिलासपुर-रायपुर रोड में सेक्टर डी के पास मंडपम भवन के बाजू की जमीन को नगर निगम ने नगर पालिक निगम अधिनियम के अंतर्गत अधिकार हक और हित के अधीन प्रबंधन अधिग्रहण कर लिया है। प्रबंधन अधिग्रहण की कार्रवाई कर निगम ने एसडीएम को नामांतरण के लिए पत्र भी लिखा है।

उक्त जमीन में अवैध कॉलोनी और प्लाटिंग की जांच के लिए कलेक्टर द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, कलेक्टर द्वारा गठित समिति ने छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292-ग के अन्तर्गत प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्राथमिकी दर्ज किये जाने एवं छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292-च (अवैध कॉलोनी निर्माण की भूमि का प्रबंधन आयुक्त द्वारा अधिग्रहित किया जाना) एवं 292 छ, (अवैध कॉलोनी निर्माण वाली भूमि का समपहरण) के अन्तर्गत कार्यवाही प्रस्तावित किये जाने की अनुशंसा की थी।

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उक्त अनुशंसा अनुसार आयुक्त नगर पालिक निगम बिलासपुर द्वारा 03 आम सूचना के माध्यम से दावा-आपत्ति आमंत्रित किया गया था जिसमे क्रमशः प्रथम आम सूचना 04/09/2025 में प्राप्त 30 दावा आपत्तियों, द्वितीय आम सूचना दिनांक 19/09/2025 में प्राप्त 21 दावा आपत्तियों एवं तृतीय आम सूचना दिनांक 14/10/2025 में प्राप्त 12 दावा आपत्तियों का निराकरण करते हुए व्यक्तिगत सुनवाई की गई थी। जिसके बाद प्राप्त दावा आपत्तियों के निराकरण एवं सुनवाई के पश्चात गुण-दोष के आधार पर प्रकरण से संबंधित ग्राम तिफरा स्थित भूमि खसरा नं 1367/9, 1369/2, 1370/2. 1357, 1369/3, 1355/7, 1371, 1372/2, 1356/1, 1356/2, 1366/1, 1355/4, 1355/6, 1388, 1369/5, 1370/5, 1367/10, 1368/2, 1355/8, 1367/11, 1368/3, 1367/13, 1368/5, 1075/1ख, 1075/1ग, 1355/10, 1355/5, 1367/12, 1368/4, 1369/4, 1370/4, 1372/1 कुल रकबा 19.35 एकड़ की भूमि को छ.ग. नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292-च (अवैध कॉलोनी निर्माण की भूमि का प्रबंधन आयुक्त द्वारा अधिग्रहित किया जाना) एवं 292 छ, (अवैध कॉलोनी निर्माण वाली भूमि का समपहरण) के अन्तर्गत अधिकार हक और हित के अधीन प्रबंधन अधिग्रहण किया गया है। नामांतरण के लिए निगम कमिश्नर अमित कुमार ने एसडीएम को पत्र लिखा है.

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हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत, आज होगी सुनवाई

नगर निगम की कार्रवाई का विरोध करते हुए भूमि स्वामी सुरेंद्र जायसवाल ने याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुये शुक्रवार को सुनवाई का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि नगर निगम ने जवाब देने के लिए समय मांगा, जब मामला 04.नवंबर 2025 को सुनवाई के लिए आया और उसके बाद 12.नवंबर 02025 को जवाब दाखिल किया गया। उन्होंने आगे तर्क दिया कि 04.नवंबर.2025 से प्रतिवादी प्राधिकारी इस न्यायालय के समक्ष भूमि विक्रय के संबंध में लंबित कार्यवाही के बारे में जानते थे, जो कि नगर निगम अधिनियम की धारा 292 ई एंड एफ के तहत कार्यवाही में प्रतिवादी प्राधिकारियों द्वारा विचाराधीन था। मामले की सुनवाई होने का इंतजार किए बिना कल और आज सुबह जवाब दाखिल किया गया, जिसे आज सूचीबद्ध किया गया है।

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एक आदेश पारित किया गया है। उन्होंने प्रस्तुत किया कि 11:00 बजे याचिकाकर्ता के इस न्यायालय द्वारा मामले की सुनवाई के अधिकार को विफल करने के उद्देश्य से एक आदेश पारित किया गया है, जिन आधारों पर दलील दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि आदेश की प्रति, जो उन्हें सौंपी गई है और इस न्यायालय के समक्ष रखी गई है, से पता चलता है कि आदेश पारित करने के तुरंत बाद, इसे राजस्व रिकॉर्ड में नगर निगम का नाम बदलने के लिए एसडीएम बिलासपुर को भेज दिया गया था, जो याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रतिवादी अधिकारियों की बुरी मंशा को दर्शाता है। मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुये शुक्रवार को सुनवाई का निर्देश दिया है।


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