President Visit: सरगुजा में बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: “मैं आदिवासी समाज की बेटी हूं, छत्तीसगढ़ आकर अपना घर जैसा लगता है”
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सरगुजा। जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर अंबिकापुर की धरती बुधवार को ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यहां पहुंचकर जनजातीय समाज के बीच अपना दिल खोलकर रखा। राष्ट्रपति मंच पर पहुंचीं तो संबोधन की शुरुआत “नमस्कार” और “जय जोहार” से की। कुछ वाक्य छत्तीसगढ़ी में बोलते ही मैदान में बैठी भीड़ उत्साह से झूम उठी।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, संघर्ष और बलिदान से भरा है, और उन्हें इस बात पर गर्व है कि वे स्वयं आदिवासी समाज की बेटी हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मुझे हमेशा इस बात का गर्व रहता है कि मैं आदिवासी समाज की बेटी हूं। छत्तीसगढ़ आकर मुझे अपना घर और अपना परिवार जैसा अहसास होता है।” उनकी इस बात पर पूरे पंडाल में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।

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राष्ट्रपति ने भगवान बिरसा मुंडा और “छत्तीसगढ़ महतारी” को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय समाज के महापुरुषों ने आजादी की लड़ाई से लेकर समाज सुधार तक, हर मोर्चे पर अहम भूमिका निभाई है, लेकिन उन्हें इतिहास की किताबों में जितनी जगह मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय इसी कड़ी का हिस्सा है, जिसने पूरे देश में आदिवासी समाज के गर्व और स्वाभिमान को नई पहचान दी है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने छत्तीसगढ़ की 25 वर्ष की विकास यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष में जनजातीय गौरव दिवस और जनजातीय संग्रहालय जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का होना, छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। उन्होंने नवा रायपुर में प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पित ट्राइबल म्यूजियम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को उनके इतिहास और विरासत से जोड़ेगा।

बस्तर की मुरिया दरबार पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सोच और सामूहिक निर्णय का एक अनूठा प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति संरक्षण, सामूहिक नेतृत्व और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं।

राष्ट्रपति ने खास तौर पर जनजातीय महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वे जहां भी जाती हैं, वहां आदिवासी बहनों से मिलने और उनसे बात करने को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने कहा, “महिलाएं समाज की जननी हैं। अगर हमारी बेटियां और बहनें मजबूत बनेंगी तो पूरा समाज मजबूत होगा।” उन्होंने जनजातीय समाज से अपील की कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और आधुनिक अवसरों को अपनाते हुए अपनी पारंपरिक पहचान और संस्कृति को भी सहेज कर रखें।

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कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी मंच से राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह बेहद सम्मान का विषय है कि देश की राष्ट्रपति स्वयं यहां आकर जनजातीय समाज के बीच बैठीं और उनका उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का आदिवासी इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। यहां के 14 से अधिक महापुरुषों ने आजादी की लड़ाई में अपने प्राण न्यौछावर किए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना और अन्य योजनाओं के जरिए दूरस्थ आदिवासी अंचलों में सड़क, बिजली, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं तेज गति से पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता की कीमत बढ़ाने से लेकर वन उपज के बेहतर दाम दिलाने तक, सरकार लगातार जनजातीय समाज की आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

बस्तर और सरगुजा जैसे लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वहां शांति लौट रही है, सड़कें बन रही हैं, स्कूल खुल रहे हैं और युवा अब बंदूक नहीं, किताब और कलम चुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और जल्द ही पूरा क्षेत्र मुख्यधारा के विकास से जुड़ जाएगा।

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जनसभा में मौजूद लोगों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान “जय जोहार” और नारों के साथ राष्ट्रपति का स्वागत किया। मंच पर जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और छात्र-छात्राओं का सम्मान भी किया गया। अंत में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़ के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि यहां आने पर उन्हें हमेशा स्नेह, सम्मान और अपनापन मिला है, और वे उम्मीद करती हैं कि आने वाले वर्षों में भी छत्तीसगढ़ जनजातीय गौरव, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास के पथ पर इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा।


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