राज्य सरकार ने कहा- PG Rule 2025 को विधि विभाग ने दे दी है मंजूरी, जल्द जारी होगा नोटिफिकेशन

Share on

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में नीट क्वालीफाई के बाद पीजी में एडमिशन के लागू डोमिसाइल आधारित आरक्षण को डा समृद्धि दुबे ने चुनौती दी है। छत्तीसगढ़ में नियम है कि छत्तीसगढ़ से एमबीबीएस पास करने वाले चिकित्सक को पीजी में पहले प्रवेश दिया जाता है। सीट खाली होने की स्थिति में अन्य राज्य के एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सक को पीजी में एडमिशन दिया जाता है। याचिकाकर्ता डा समृद्धि दुबे छत्तीसगढ़ की मूल निवासी हैं, एमबीबीएस की पढ़ाई छत्तीसगढ़ से बाहर रहकर की है। राज्य में लागू डोमिसाइिल आधारित आरक्षण को चुनौती है। महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने डिवीजन बेंच को बताया कि राज्य सरकार पीजी रूल्स 2025 ला रही है। विधि विधायी विभाग ने इसे स्वीकार कर लिया है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच में हुई। महाधिवक्ता ने डिवीजन बेंच को बताया कि राज्य सरकार ने नियमों को अंतिम रूप दे दिया है। विधि विधायी विभाग की सहमति मिल गई है। जल्द ही इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। एजी डिवीजन बेंच को जानकारी दी कि साथ ही राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग NMC ने पीजी में एडमिशन के लिए पूर्व निर्धारित तिथि को दो दिन आगे बढ़ा दिया है। महाधिवक्ता के जवाब के बाद हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने 10 नवंबर की तिथि तय कर दी है।

Also Read – सोशल मीडिया में विभाग की खोली पोल , मिली निलंबन की सजा

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव, अधिवक्ता संदीप दुबे राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भरत, उप-महाधिवक्ता शशांक ठाकुर के अलावा अन्य पक्षकारों की ओर से अधिवक्ता धीरज वानखेड़े का पक्ष रख रही अधिवक्ता ऐश्ले श्रीवास्तव,अधिवक्ताअनमोल शर्मा और अधिवक्ता धीरज सुराना ने पैरवी की।

ये है मामला

डा समृद्धि दुबे ने राज्य मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट एडमिशन नियम 2021 की वैधता को चुनौती दी है। याचिका में कहा है कि नियम 11(क) और आंशिक नियम 11(ख) संस्थान व निवास आधारित आरक्षण प्रदान करते हैं, जो असंवैधानिक है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में प्रत्युत्तर रिज्वाइंडर दाखिल करने की अनुमति दी थी।

डा समृद्धि दुबे ने अपनी याचिका में बताया कि नियम 11(क) उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता देता है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के कॉलेजों से MBBS किया है या फिर सर्विसिंग कैंडिडेट (वर्तमान में सेवा में लगे डॉक्टर) हैं। नियम 11(ख) का हिस्सा यह कहता है कि यदि इन श्रेणियों के बाद सीटें खाली रह जाती हैं तो केवल उन्हीं को एडमिशन मिलेगा, जो छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं। चाहे उन्होंने MBBS राज्य के बाहर के कॉलेज से किया हो। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह प्रावधान छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के बीच अनुचित भेदभाव करता है। एक तरफ वे जिन्होंने राज्य के कॉलेज से पढ़ाई की, दूसरी तरफ वे जिन्होंने राज्य के बाहर से MBBS किया। याचिका के अनुसार नियम 11(क) और 11(ख) मिलकर वास्तव में 100% आरक्षण की स्थिति बना देते हैं।

Also Read – राज्य सरकार व सतीश जग्गी की याचिका खारिज, सीबीआई की याचिका का स्वीकार

याचिकाकर्ता डॉ. समृद्धि दुबे छत्तीसगढ़ की स्थायी निवासी हैं। उन्होंने 2018 में NEET-UG के आधार पर वीएमकेवी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सलेम (तमिलनाडु) से MBBS में दाखिला लिया। 2023 में पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप और मेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने NEET-PG 2025 परीक्षा दी और उसमें क्वालिफाई हुईं। याचिका में यह भी कहा गया कि छत्तीसगढ़ में लागू यह प्रावधान डॉ. तन्वी भेल बनाम श्रेया गोयल (2025) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है, जिसमें कहा गया कि PG मेडिकल एडमिशन में डोमिसाइल या रेजिडेंस आधारित आरक्षण असंवैधानिक है।


Share on
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!