शराब घोटाला: चैतन्य बघेल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाले में कमीशनखोरी के आरोप में जेल में बंद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की अग्रिम जमानत याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। चैतन्य की एक अन्य याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा EOW और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ACB ने वर्ष 2019 से 2023 के बीच हुए शराब घोटाले में FIR दर्ज की है। चैतन्य बघेल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 (लोक सेवक को रिश्वत देने का अपराध) और धारा 12 (अपराध में सहायता का दंड) के अलावा भारतीय दंड संहिता IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (कीमती सुरक्षा दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का वास्तविक के रूप में प्रयोग) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। रायपुर के एडिशनल सेशन जज ने चैतन्य की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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जुलाई, 2023 में प्रवर्तन निदेशालय ED ने गोपनीय रिपोर्ट तैयार की, जिसमें आरोप लगाया गया कि कुछ सरकारी अधिकारी, देशी शराब डिस्टिलरी मालिकों और आबकारी विभाग के अफसरों के साथ मिलकर शराब की बिक्री में कमीशनखोरी के जरिये करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा रहे थे। सिंडीकेट ने 2019 से 2023 के बीच घोटाले को अंजाम दिया। जांच एजेंसियों के मुताबिक तकरीबन 2161 करोड़ रुपये का घोटाला है। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकारी शराब दुकानों के समानांतर एक नया सिंडिकेट सिस्टम बनाया गया, जिसके तहत डिस्टिलरी मालिकों को बिना रिकॉर्ड शराब बनाने, नकली होलोग्राम लगाने और उसे सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचने के लिए घोटाले में हिस्सेदार बनाया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस सिंडिकेट में शामिल अफसरों, कारोबारियों में से एक थे और घोटाले से अर्जित राशि का हिसाब-किताब संभालते थे। बताया गया कि उन्होंने लक्ष्मीनारायण बंसल की मदद से करीब 1000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। जांच एजेंसी का आरोप है कि चैतन्य ने कमीशन से मिले एक हजार करोड़ रुपये के ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए रियल स्टेट के धंधे में लगाना बताया। शराब घोटाले में ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम PMLA के तहत मामला दर्ज किया और 18 जुलाई, 2025 को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया। ED ने गिरफ्तारी के आधार में कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, तथ्यों को छिपा रहे थे और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते थे।

Reserve for Order
चैतन्य बघेल ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गिरफ्तारी को चुनौती दी है। याचिका में कहा है कि ED ने गिरफ्तारी के लिए जो आधार बताए वे केवल टेम्पलेट ग्राउंड हैं, जिनमें कोई ठोस कारण नहीं है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया और कहा कि गिरफ्तारी PMLA की धारा 19 के तहत निर्धारित कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है। याचिका के अनुसार उसे तीन सालों से कोई समन जारी नहीं हुआ ऐसे में सहयोग न करने का आरोप निराधार है और ED के पास पहले से ही सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। चैतन्य बघेल की उस याचिका को जिसमें उन्होंने गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी है। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।

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