बिलासपुर। सिविल इंडिया ने मस्तूरी शूट आउट को लेकर पहले ही सुपारी किलिंग की ओर इशारा किया था। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियाें को रिमांड पर लेकर अपने स्टाइल में पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस को पहले ही दिन से सुपारी किलिंग की आशंका है। पर्दे के पीछे रोल अदा करने वालों की तलाश में पुलिस गंभीरता के साथ जुट गई है। शूटरों को धन देने से लेकर हथियार सप्लाई करने, हथियार सही हाथों तक पहुंचाने के पीछे कितने चैनलों ने काम किया, शूट आउट का मास्टर माइंड कौन, असली किंगपीन कहां छिपा बैठा है। जैसे अहम सवाल अब भी लोगों की जुबान पर है। पुलिस पूछताछ में कुछ चाैंकाने वाली बात सामने आने लगी है।
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मस्तूरी गोलीकांड में शूटरों ने तो अपनी मंशा जाहिर कर दी थी। शूट भी कर दिया था, ये अलग बात है कि निशाना चूक गया या यूं कहें कि सही टारगेट पर नहीं लगा। गोली चली, दो लोग घायल हुए, पर दोनों अब खतरे से पूरी तरह बाहर हैं और सुरक्षित है। शूट आउट की घटना में शामिल आरोपियों को पकड़ने और सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस कामयाब रही। इसके लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गोलीकांड का असली मकसद और पीछे छिपे कई राज अब भी खुलने बाकी है। किंगपीन कौन है। सुपारी किलिंग के पीछे सियासी वर्चस्व और जमीन के धंधे के अलावा और क्या-क्या हो सकता है। शूटरों का टारगेट लग जाता तो असली फायदा किसको होता। यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर गोली चलवाने और रास्ते से हटाने के पीछे बड़ी दुश्मनी और मजबूरी क्या हो सकती है। इन सब सवालों का जवाब पुलिस को तो चाहिए ही। टारगेटेट परिवार, परिजन और शुभचिंतकों को इस तरह के सवाल डरा भी रहे हैं और जवाब भी तलाश रहे हैं।
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बहरहाल पुलिस ने आरोपियों को रिमांड पर लेकर अपने अंदाज में पूछताछ शुरू कर दी है। यह भी जानकारी मिल रही है कि पूछताछ के दौरान चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। मस्तूरी की गलियों में चली गोली की गूंज सियासत में सुनाई देने लगी है। लोगों के बीच इस बात की चर्चा तेजी से चल रही है और वह है राजनीतिक संरक्षण को लेकर। बहरहाल पूछताछ में पुलिस को कई ऐसे इनपुट मिले हैं जिससे आगे की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिलेगी या फिर ये इनपुट कड़ियों को जोड़ने में काफी मददगार साबित होगा। शूट आउट के मास्टर माइंड, शूटरों को तय करना और रेकी में शूटरों को मदद करने वालों की तलाश भी तेजी के साथ हो रही है।
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राजनीतिक प्रतिद्वंदिता और सियासी संरक्षण की चर्चा
पुलिस जांच में तारकेश्वर पाटले का नाम सामने आया है, वह कांग्रेस नेता है और उसी से एक लाख रुपए लेकर विश्वजीत ने शूटरों को बतौर सुपारी दी थी। मुख्य आरोपी विश्वजीत अनंत कांग्रेस से निष्कासित है। वह युवक कांग्रेस का उपाध्यक्ष रह चुका है। कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद सत्ताधारी दल के एक नेता से घनिष्ठता की चर्चा भी हो रही है। शूट आउट में इस्तेमाल किए गए देसी कट्टा, पिस्टल और कारतूस की सप्लाई चेन को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। सप्लायर से लेकर वहां तक पहुंचकर सौदेबाजी करने वाले चेहरे की भी पुलिस को तलाश है। एएसपी ग्रामीण अर्चना झा ने मीडिया को बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पिस्टल और कट्टा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।








