सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रदेश के 1378 शिक्षकों के प्रिंसिपल बनने का रास्ता होगा साफ

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बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के बाद देशभर के हाई कोर्ट के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किया है। सुरक्षित रखे गए फैसलों पर अब तीन महीने के भीतर फैसला सुनना होगा। कोर्ट के इस आदेश से प्रदेश के 1378 ई संवर्ग के व्याख्याताओ की उम्मीद जग गई है। ये सभी प्राचार्य बनने की कतार में शामिल हैं।

राज्य सरकार ने शिक्षकों के प्रमोशन के लिए ई और टी संवर्ग बनाया है। टी संवर्ग के व्याख्याताओ को प्राचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी गई है। ई संवर्ग के 1378 लेक्चरर का मामला अब भी हाई कोर्ट में लंबित है। याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसका असर उन व्याख्याताओं पर पड़ रहा है जो रिटायरमेंट के करीब है। शिक्षा विभाग के आंकड़े पर नजर डालें तो हर महीने 25 से 30 व्याख्याता रिटायर हो रहे हैं। ऐसे शिक्षकों की उम्मीदें अब बढ़ गई है।

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सब-कुछ ट्रांसपरेंट

सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा कि देशभर के हाई कोर्ट को अपनी मौजूदा पद्धति व प्रारूप में जरुरी व उचित संशोधन करना होगा। बेंच ने यह भी कहा कि संशोधन के पीछे की मंशा साफ है, इससे कोर्ट ने किस तिथि में फैसला सुरक्षित रखा, रिजर्व फार आर्डर के कितने दिनों बाद फैसला सुनाया, वेबसाइट पर फैसले को किस दिन अपलोड किया गया। यह सब साफ-साफ देखा जा सकेगा।

पांच दिन के भीतर देनी होगी जानकारी

रिजर्व फार आर्डर के मामले में हाई कोर्ट को यह भी जानकारी देनी होगी, रिजर्व फार आर्डर में फैसला केवल कार्यकारी भाग की थी या फिर पूरा निर्णय सुनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है, कार्यकारी भाग का ही निर्णय सुनाया जाता है, इसमें पांच दिनों के भीतर कारणों का उल्लेख भी करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने जरुरी डेडलाइन तय कर दिया है।

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क्या है मामला

झारखंड हाई कोर्ट ने क्रिमिनल अपील पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षितरख लिया था। तीन साल तक फैसला नहीं आया। अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व फार आर्डर के मामले में देशभर के हाई कोर्ट के लिए जरुरी दिशा निर्देश जारी किया है।

फैसला सुरक्षित रखने के बाद कोर्ट द्वारा फैसला सुनाने में हो रहे विलंब को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी के साथ ही हैरानी भी जताई है। झारखंड हाई कोर्ट ने क्रिमिनल मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। तीन साल बाद भी कोर्ट ने आदेश नहीं सुनाया। इसे लेकर अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए देशभर के हाई कोर्ट के लिए जरुरी गाइड लाइन जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब छत्तीसगढ़ सहित देशभर के हाई कोर्ट को सुनाए जाने वाले फैसलों की एक-एक जानकारी अपलोड करनी होगी। रिजर्व फार आर्डर के मामले में फैसला सुनाते वक्त हाई कोर्ट को फैसला सुरक्षित रखने, रिजर्व फार आर्डर में फैसला सुनाने और इसे वेबसाइट पर अपलोड करने की तिथियों का साफ-साफ उल्लेख करना होगा।

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मसलन हाई कोर्ट की बेंच ने किस मामले में कब फैसला सुरक्षित रखा, रिजर्व फार आर्डर के कितने दिनों बाद अपना फैसला सुनाया और इसे कब वेबसाइट पर अपलोड किया। अलग-अलग और साफ-साफ तारीखों का उल्लेख करना होगा। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में देशभर के हाई कोर्ट को दिशा निर्देशों के परिपालन के लिए डेडलाइन जारी किया है। डिवीजन बेंच ने हाई कोर्ट को अपनी मौजूदा सिस्टम और प्रारूप में संशोधन करने का निर्देश दिया है।


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