सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि PG और हॉस्टल को किराए पर चढ़ाने के बाद भी तय नियमों के अनुसार GST छूट जारी रहेगा।
Share on

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी के दायरे को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पेइंग गेस्ट (PG) और हॉस्टल के रूप में उपयोग होने वाली आवासीय संपत्तियों पर भी जीएसटी छूट जारी रहेगी, बशर्ते अंतिम उपयोग आवासीय हो। अदालत ने राजस्व विभाग की अपील को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा और कहा कि जीएसटी छूट की अधिसूचना का अर्थ केवल डिग्री या श्रेणी के आधार पर नहीं, बल्कि संपत्ति के वास्तविक उपयोग के आधार पर निकाला जाना चाहिए। यह फैसला देशभर में हजारों PG और हॉस्टल संचालकों के लिए राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से इस कर विवाद में उलझे हुए थे।

यह विवाद कर्नाटक के एक चार मंजिला भवन से जुड़ा था जिसमें कुल 42 कमरे थे। भवन मालिक ने यह संपत्ति एक निजी कंपनी को किराए पर दी थी, जो इसे छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए लंबे समय तक रहने हेतु PG और हॉस्टल के रूप में उपलब्ध कराती थी। जीएसटी विभाग का तर्क था कि किरायेदार कंपनी इस भवन का उपयोग वाणिज्यिक उद्देश्यों से कर रही है, क्योंकि वह खुद भवन में नहीं रहती बल्कि इसे व्यावसायिक लाभ के लिए दूसरों को किराए पर देती है। इस आधार पर विभाग ने इसे 18% जीएसटी के दायरे में लाने का दावा किया था। एएआर (AAR) और एएएआर (AAAR) दोनों ने भी विभाग की इस व्याख्या को सही माना।

Also Read – ड्यूटी पर लगाए गए सरकारी कर्मचारी को करना होगा काम, यह वैधानिक बाध्यता है।

हालांकि, कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह कहते हुए इस तर्क को खारिज कर दिया कि भवन का मूल उपयोग आवासीय है, इसलिए जीएसटी छूट लागू होगी। हाई कोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देते हुए राजस्व विभाग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों वाली बेंच—जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने स्पष्ट किया कि 28 जून 2017 की जीएसटी छूट अधिसूचना (नोटिफिकेशन 9/2017, एंट्री 13) में कहीं भी यह अनिवार्यता नहीं रखी गई है कि किरायेदार स्वयं उस आवास का उपयोग निवास के रूप में करे। अधिसूचना में केवल इतना महत्वपूर्ण है कि संपत्ति का अंतिम उपयोग आवासीय आवास के रूप में हो।

अदालत ने आवासीय आवास की अपनी व्याख्या भी प्रस्तुत की। कोर्ट ने कहा कि आमतौर पर आवासीय आवास किसी ऐसे भवन को कहा जाता है जहां लोग रहने, सोने और दैनिक जीवन बिताने के उद्देश्य से रहते हैं। इसलिए, ऐसे हॉस्टल और PG जहां लोग लंबे समय तक रहते हैं, वे भी आवासीय आवास की ही श्रेणी में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि किराया देने वाला व्यक्ति चाहे कंपनी हो, किरायेदार चाहे आगे हॉस्टल चलाए जब तक अंतिम उपयोग आवासीय है, जीएसटी छूट लागू रहेगी।

Also Read – जांच में लापरवाही और पीड़िता से 20 हजार रुपये का कर लिया उगाही, एसपी ने महिला एएसआई को किया निलंबित

महत्वपूर्ण बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के उस संशोधन का भी उल्लेख किया जिसमें यह कहा गया था कि यदि कोई पंजीकृत जीएसटी करदाता आवासीय संपत्ति किराये पर लेता है, तो उसे छूट प्राप्त नहीं होगी। अदालत ने साफ कर दिया कि यह संशोधन पूर्व प्रभाव से लागू नहीं हो सकता और इसलिए 2022 से पहले की सभी PG/हॉस्टल लीज़ पर पुरानी छूट जारी रहेगी।

यह फैसला देशभर के PG ऑपरेटरों, हॉस्टल संचालकों और रेंटल मार्केट के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि केवल किरायेदार की पहचान या व्यावसायिक स्वरूप के आधार पर आवासीय किराये को वाणिज्यिक मानकर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम उपयोग को सबसे महत्वपूर्ण तत्व माना है और कहा है कि यदि संपत्ति का उपयोग रहने के लिए हो रहा है, तो उसे residential माना जाएगा और जीएसटी छूट लागू होगी ही।


Share on

Related Posts

CG High Court News: बगैर मान्यता, स्कूलों ने एडमिशन के लिए जारी किया विज्ञापन: नाराज हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से शपथ पत्र के साथ मांगा जवाब।

Share on

Share onCG High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में गजब हो रहा है। बिना मान्यता वाले स्कूल प्रबंधन द्वारा स्कूलों में एडमिशन के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया जा रहा है। हाई


Share on
Read More

CG Transfer News: छत्तीसगढ़ बलरामपुर जिले में राजस्व विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। 58 पटवारियों का एक साथ तबादला आदेश जारी किया है।

Share on

Share onCG Transfer News: बलरामपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और राजस्व विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए एक


Share on
Read More

बड़ी खबर

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, सरकारी कर्मचारी को बिना विभागीय जांच के सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। बर्खास्तगी से पहले विभागीय जांच का आदेश जारी करना और संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष का पर्याप्त अवसर देना होगा।

Read More »

About Civil India

© 2025 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited

error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!