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सुप्रीम कोर्ट की SIT से वंतारा को क्लीन चिट

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दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल SIT ने गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा प्राणी बचाव और पुनर्वास केंद्र (ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर) को क्लीन चिट दे दी है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी वराले की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, SIT ने विशेषज्ञों की मदद से जांच की है। इसमें कोई उल्लंघन नहीं पाया। सुप्रीम काेर्ट ने कहा, वंतारा ने कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय मानकों से बढ़कर बेहतर काम किया है। वन्य प्राणियों और हाथियों का अधिग्रहण कानून के अनुरुप किया गया है। डिवीजिन बेंच ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा,बार-बार इस तरह की याचिका दायर कर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए दो टूक कहा,अब इस पर किसी कोर्ट, प्राधिकरण या ट्रिब्यूनल में नई याचिका/आपत्ति स्वीकार नहीं होगी।

डिवीजन बेंच ने कहा, एसआईटी रिपोर्ट का सारांश सार्वजनिक होगा, बेंच ने यह भी कहा कि पूरी रिपोर्ट संबंधित पक्षों के पास रहेगी। अधिकारी सिफारिशों पर कार्रवाई कर सकेंगे। किसी गलत या अपमानजनक प्रकाशन या प्रसारण पर वंतारा मानहानि का दावा करने की छूट भी दी है।

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क्या है SIT रिपोर्ट में


डिवीजन बेंच ने 25 अगस्त को जस्टिस जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया था। जस्टिस चेलमेश्वर सबसे प्रतिष्ठित और स्वतंत्र न्यायविदों में हैं। स्वतंत्र और बेबाक राय वाले जज के तौर पर देश में उनकी पहचान है। जांच कमेटी में हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राघवेंद्र चौहान, पूर्व पुलिस आयुक्त हेमंत नागराले और पूर्व आईआरएस अधिकारी अनीश गुप्ता को शामिल किया गया था। एसआईटी ने माना है कि वंतारा ने पशुओं का अधिग्रहण नियामकीय अनुपालन के तहत किया गया है। पशुओं का अधिग्रहण प्रथम दृष्टया नियामक तंत्र के दायरे में है।

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एसआईटी को सुप्रीम कोर्ट ने किया स्वीकार, केस किया बंद


डिवीजन बेंच ने कहा,एसआईटी को रिपोर्ट को स्वीकार कर रहे हैं और मामले को बंद कर रहे हैं। हम समिति की रिपोर्ट से संतुष्ट हैं। हमारे पास एक स्वतंत्र समिति की रिपोर्ट है। उन्होंने हर चीज़ की जांच की है, उन्होंने विशेषज्ञों की मदद ली है।
हम किसी को भी बार-बार सवाल उठाने की अनुमति नहीं देंगे। बेंच ने कहा, देश में कुछ अच्छी चीजें होने दें। हमें इन सभी अच्छी चीजों पर खुश होना चाहिए। अगर हाथी का अधिग्रहण कानून के अनुसार है तो इसमें क्या कठिनाई है।


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