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FIR रद्द करने दायर की थी याचिका, हाई कोर्ट ने किया खारिज

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बिलासपुर। फर्जी वर्क ऑर्डर जारी कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कराने हाई कोर्ट पहुंची महिला डिप्टी कलेक्टर को बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में ट्रायल आवश्यक है।

महिला डिप्टी कलेक्टर ज्योति बबली कुजूर पर आरोप है कि वाड्रफनगर जनपद पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर पदस्थ रहते हुए उन्होंने फर्जी वर्क ऑर्डर जारी कर शासन को लगभग 30 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया। इस मामले में बसंतपुर थाना, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 420, 409 एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7(1) एवं 13 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने मामले में चालान भी पेश कर दिया है।

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याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट में दायर याचिका में यह तर्क दिया गया था कि तत्कालीन एसडीओपी वाड्रफनगर ने व्यक्तिगत रंजिश के चलते उन्हें झूठे मामले में फंसाया है। साथ ही यह भी बताया गया कि विभागीय जांच में उन्हें 28 जुलाई 2021 के आदेश से आरोपों से बरी कर दिया गया था, इसलिए आपराधिक प्रकरण को भी रद्द किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत वेदप्रकाश पांडेय द्वारा दर्ज कराई गई थी और प्रकरण केवल पुलिस अधिकारी की व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम नहीं कहा जा सकता।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए तर्क मूल रूप से तथ्यों और साक्ष्यों के मूल्यांकन से जुड़े हैं, जिन पर निर्णय लेने का अधिकार ट्रायल कोर्ट को है, न कि रिट क्षेत्राधिकार में बैठे हाई कोर्ट को। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर एफआईआर या चार्जशीट को रद्द करना न्यायोचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी माना कि विभागीय जांच और आपराधिक कार्यवाही दोनों का उद्देश्य और दायरा अलग-अलग होता है। केवल विभागीय जांच में बरी होने के आधार पर आपराधिक मुकदमे को स्वतः समाप्त नहीं किया जा सकता।

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इन आधारों पर हाई कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने, अभियोजन स्वीकृति को निरस्त करने और पूरी आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब महिला डिप्टी कलेक्टर को ट्रायल कोर्ट में मुकदमे का सामना करना होगा।


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