CG NEWS: सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के 10 दिन बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने, पीड़ितों को न्याय दिलाने और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
हादसे में 25 मजदूरों की मौत
14 अप्रैल को हुए इस भीषण ब्लास्ट में अब तक 25 मजदूरों की मौत हो चुकी है। हादसे में कुल 36 लोग झुलसे थे। इनमें से:
- 3 मजदूरों की हालत अब भी गंभीर है
- 5 मरीज ऑब्जर्वेशन में हैं
- 2 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है
शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही
हादसे के अगले दिन औद्योगिक सुरक्षा विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। बॉयलर इंस्पेक्टर उज्जवल गुप्ता की रिपोर्ट में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।
कैसे हुआ ब्लास्ट
जांच में सामने आया है कि बॉयलर फर्नेस के भीतर अत्यधिक मात्रा में ईंधन जमा हो गया था, जिससे दबाव तेजी से बढ़ा। इसी दबाव के कारण बॉयलर का निचला पाइप अपनी स्थिति से हट गया और विस्फोट हो गया। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में भी यही कारण बताया गया है।
2 सेकंड में मचा कहर
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार हादसा 14 अप्रैल दोपहर 2:33 बजे हुआ। उस समय 2028 TPH क्षमता वाले विशाल बॉयलर में फर्नेस प्रेशर अचानक बढ़ गया। यह दबाव केवल 1 से 2 सेकंड में इतना बढ़ा कि सिस्टम बंद करने या खराबी रोकने का समय ही नहीं मिला।
उत्पादन बढ़ाने के दबाव में हादसा?
जांच में यह भी सामने आया है कि एक घंटे में उत्पादन दोगुना करने के लिए बॉयलर का लोड तेजी से बढ़ाया गया था।
- पहले लोड: 350 मेगावाट
- बाद में बढ़ाकर: लगभग 590 मेगावाट
कम समय में इतनी तेजी से लोड बढ़ाने को भी हादसे का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
NGSL के जिम्मे था ऑपरेशन
वेदांता प्रबंधन ने पिछले वर्ष प्लांट के संचालन और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी NGSL को सौंपी थी। इसमें मशीनों की निगरानी, तकनीकी खराबियों की पहचान, सुरक्षा मानकों का पालन और उपकरणों का रखरखाव शामिल था। अब ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़े सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
NHRC ने क्यों लिया संज्ञान
लगातार बढ़ती मौतों, गंभीर घायलों की स्थिति और लापरवाही के आरोपों को देखते हुए NHRC ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग जानना चाहता है:
- हादसे की वास्तविक वजह क्या थी
- जिम्मेदार कौन हैं
- सुरक्षा नियमों का पालन हुआ या नहीं
- पीड़ितों को क्या सहायता दी गई
मजिस्ट्रियल जांच जारी
कलेक्टर अमृत विकास टोपनो ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। 30 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
जांच के मुख्य बिंदु:
- हादसा कैसे हुआ
- तकनीकी या मानवीय गलती क्या थी
- कौन जिम्मेदार है
- उस दिन कौन कर्मचारी ड्यूटी पर थे
- निरीक्षण में पहले क्या कमियां मिली थीं
- भविष्य में रोकथाम के उपाय क्या हों
मुआवजे की घोषणा
वेदांता प्रबंधन ने घोषणा की है:
- मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये
- एक सदस्य को नौकरी
- घायलों को 15-15 लाख रुपये
इसके अलावा:
PMNRF से
- मृतकों के परिवार को 2 लाख रुपये
- घायलों को 50 हजार रुपये
छत्तीसगढ़ सरकार से
- मृतकों के परिवार को 5 लाख रुपये
- घायलों को 50 हजार रुपये
प्रदेश में उठे सवाल
इतने बड़े औद्योगिक हादसे के बाद सुरक्षा मानकों, निजी कंपनियों की जवाबदेही और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर NHRC और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट पर टिकी है।








