Civil India News App Download
📢 Advertise With Us

Bilaspur High Court: कोल स्कैम: रजनीकांत की डायरी ने खोले घोटाले के राज, IAS रानू साहू भी जांच के घेरे में

Share on

Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और उनके रिश्तेदारों को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी याचिकाएं खारिज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अटैच की गई संपत्तियों को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों को अत्यंत गंभीरता से देखा जाना चाहिए। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में प्रत्यक्ष साक्ष्य होना आवश्यक नहीं है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य, वित्तीय लेन-देन की श्रृंखला और संपत्ति अर्जन के पैटर्न के आधार पर भी कार्रवाई वैध है।

रजनीकांत तिवारी की डायरी बनी बड़ा सबूत

📢
Advertise With Us
Reach thousands of readers with Civil India News
Get Started →

इस मामले में सबसे अहम कड़ी रजनीकांत तिवारी की जब्त डायरी मानी जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार रजनीकांत, मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी का करीबी रिश्तेदार है। उसके ठिकाने पर छापेमारी के दौरान एक डायरी बरामद हुई, जिसमें कथित रूप से अवैध कोल लेवी वसूली, रकम के बंटवारे और विभिन्न लोगों तक पैसों के प्रवाह का उल्लेख है। डायरी की प्रविष्टियों में कोयला व्यापारियों से 25 रुपये प्रति टन की वसूली का जिक्र बताया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह रकम संगठित तरीके से वसूली जाती थी।

ऑनलाइन सिस्टम बंद कर शुरू हुआ खेल

कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2020 से पहले कोयला परिवहन के लिए डीओ (Delivery Order) जारी करने की प्रक्रिया ऑनलाइन थी। आरोप है कि कोविड काल के दौरान इसे ऑफलाइन कर दिया गया, जिसके बाद कथित वसूली तंत्र सक्रिय हुआ। जांच में यह भी दावा किया गया कि डीओ जारी होने से पहले व्यापारियों को कथित रूप से वसूली राशि देनी पड़ती थी, तभी अनुमति मिलती थी।

📢
Advertise With Us
Reach thousands of readers with Civil India News
Get Started →

रानू साहू और रिश्तेदारों की संपत्तियां अटैच

ED ने रानू साहू के साथ उनके रिश्तेदारों तुषार साहू, पंकज साहू, पीयूष साहू, पूनम साहू, अरुण साहू, लक्ष्मी साहू, सहलिनी साहू और रेवती साहू की करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच की थीं। इन्हें मुक्त कराने के लिए हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा:

  • अपराध से पहले खरीदी गई संपत्तियां भी कुर्की से स्वतः मुक्त नहीं हो जातीं।
  • यदि अपराध की आय छिपा दी गई हो या उपलब्ध न हो, तो उसके समतुल्य मूल्य की अन्य संपत्तियां भी अटैच की जा सकती हैं।
  • आर्थिक अपराधों का असर केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

अदालत ने क्यों खारिज की अपील

कोर्ट ने माना कि प्रस्तुत दस्तावेज, वित्तीय विश्लेषण और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया पर्याप्त हैं। साथ ही याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि अटैच की गई संपत्तियां वैध आय से अर्जित हैं। इस आधार पर हाई कोर्ट ने सभी अपीलें खारिज कर दीं।

आगे क्या विकल्प बचा

हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो PMLA की धारा 8(8) के तहत अन्य वैधानिक उपाय अपना सकते हैं।

मामला क्यों अहम

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में केवल कागजी स्वामित्व या पुराने खरीद दस्तावेज पर्याप्त बचाव नहीं माने जाएंगे। यदि संपत्ति का स्रोत संदिग्ध है, तो जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी रह सकती है।


Share on
Civil India News App Download
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!