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Bilaspur High Court: कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: प्रमोशन पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

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Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पदोन्नति (Promotion) से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि प्रमोशन देते समय योग्यता और वरिष्ठता को दरकिनार नहीं किया जा सकता। विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की सिफारिश पर जारी पदोन्नति आदेश को निरस्त करते हुए हाई कोर्ट ने नए सिरे से DPC बुलाने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने दिया है।

क्या है पूरा मामला

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याचिकाकर्ता भारतेश नेताम ने सहायक ग्रेड-II से सहायक लेखा अधिकारी पद पर पदोन्नति में अपने नाम पर विचार नहीं किए जाने को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। उनकी ओर से अधिवक्ता संदीप दुबे ने पैरवी की।

याचिका में कहा गया कि:

  • वे सहायक ग्रेड-II पद पर कार्यरत हैं
  • 5 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं
  • सरकारी लेखा प्रशिक्षण विद्यालय से लेखा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं
  • नियमों के अनुसार पदोन्नति के लिए पात्र हैं

इसके बावजूद विभाग ने 17 जनवरी 2025 को तीन अन्य कर्मचारियों को पदोन्नति दे दी।

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कोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने कहा कि:

  • पात्र उम्मीदवारों के नाम पर विचार किए बिना प्रमोशन देना नियमों के विरुद्ध है
  • वरिष्ठता और योग्यता दोनों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
  • DPC की प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमसम्मत होनी चाहिए

प्रमोशन आदेश रद्द

कोर्ट ने 17 जनवरी 2025 को जारी पदोन्नति आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत तीन कर्मचारियों को सहायक लेखा अधिकारी पद पर पदोन्नत किया गया था।

फिर से होगी DPC

हाई कोर्ट ने सचिव नगरीय प्रशासन और नगर निगम रायपुर आयुक्त को निर्देश दिया है कि:

  • सभी पात्र उम्मीदवारों की सूची तैयार करें
  • लेखा प्रशिक्षण प्राप्त सहायक ग्रेड-II कर्मचारियों पर विचार करें
  • नई समीक्षा DPC गठित करें
  • DPC की सिफारिश के आधार पर नए सिरे से प्रमोशन आदेश जारी करें

प्रतिवादियों की दलील खारिज

प्रतिवादी पक्ष ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने पहले सहायक ग्रेड-I पदोन्नति छोड़ दी थी, इसलिए एक वर्ष तक दोबारा विचार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल एक पद के लिए विचार न करने का अनुरोध किया था, अन्य पदों के लिए नहीं।

कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला

यह निर्णय उन सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी पदोन्नति में:

  • वरिष्ठता की अनदेखी होती है
  • पात्रता के बावजूद नाम नहीं लिया जाता
  • चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रहती

अब विभागों को प्रमोशन प्रक्रिया में नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।


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