Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जनगणना कार्य में लगाई गई ड्यूटी को चुनौती देने वाले कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और इसके लिए कर्मचारियों की सेवाएं लेना पूरी तरह वैध है। जस्टिस पीपी साहू की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रशासन को जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत यह अधिकार प्राप्त है छत्तीसगढ़ में 1 मई 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इसके लिए विभिन्न जिलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चल रहे हैं।
क्या है मामला
बेमेतरा जिले के नवागढ़ जनपद पंचायत में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी मनीष जैन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कलेक्टर एवं मुख्य जनगणना अधिकारी द्वारा 9 अप्रैल 2026 को जारी आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जनगणना कार्य के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय की जनगणना शाखा में अटैच किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि यह आदेश दुर्भावनापूर्ण है और उन्हें मूल पदस्थापना स्थल से हटाकर परेशान करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। उन्होंने आदेश निरस्त कर वापस जनपद पंचायत भेजने की मांग की थी।
राज्य सरकार ने रखा यह पक्ष
राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता विवेक वर्मा ने कोर्ट में कहा कि यह सामान्य ट्रांसफर या अटैचमेंट नहीं है, बल्कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत दी गई विशेष ड्यूटी है। भारत सरकार के निर्देशानुसार 1 मई से 30 मई 2026 तक जनगणना का पहला चरण प्रस्तावित है। सरकार ने बताया कि अधिनियम की धारा 7 जिला मजिस्ट्रेट को यह शक्ति देती है कि वे पंचायत, नगर निकाय या अन्य विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवाएं जनगणना कार्य में ले सकते हैं।
हाई कोर्ट ने क्या कहा
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रशासन को स्थानीय निकायों के कर्मचारियों की सेवाएं लेने का वैधानिक अधिकार है। जिस कर्मचारी को जनगणना कार्य के लिए आदेश दिया जाता है, वह उसे मानने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जनगणना ड्यूटी के दौरान संबंधित कर्मचारी लोक सेवक की श्रेणी में माने जाते हैं। इस आधार पर याचिका खारिज कर दी गई। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को विभाग के समक्ष अभ्यावेदन देने की स्वतंत्रता दी है।
बिलासपुर में प्रशिक्षण शुरू
जिला प्रशासन ने बिलासपुर जिले में 476 शिक्षकों की ड्यूटी प्रगणक और पर्यवेक्षक के रूप में लगाई है। इनमें सबसे अधिक 221 शिक्षक बिल्हा विकासखंड से हैं। इन कर्मचारियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण 27 से 29 अप्रैल तक लाल बहादुर शास्त्री स्कूल और सेजेस दयालबंद स्कूल में आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण से अनुपस्थित रहने वाले 42 कर्मचारियों को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारी गैरहाजिर रहते हैं या विभाग प्रमुख उन्हें कार्यमुक्त नहीं करते, तो दोनों पर कार्रवाई होगी।
1 मई से शुरू होगा पहला चरण
जनगणना का पहला चरण 1 मई से 30 मई तक चलेगा, जिसमें करीब 62,500 कर्मचारी घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और प्रारंभिक जानकारी एकत्र करेंगे। नागरिक 30 अप्रैल तक डिजिटल पोर्टल पर स्वयं गणना भी कर सकेंगे। अभियान के दौरान बिना कलेक्टर अनुमति अवकाश पर भी रोक रहेगी।