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CG Crime News: तस्करों और माफिया का बड़ा खेल, सागौन-साल की लकड़ियों की बेखौफ तस्करी

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CG Crime News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल के जंगलों में वन माफिया और लकड़ी तस्करों का बड़ा खेल सामने आया है। अचानकमार क्षेत्र से जुड़े जंगलों में बड़े पैमाने पर सागौन और साल जैसे बेशकीमती पेड़ों की कटाई किए जाने का खुलासा हुआ है। स्टेट फ्लाइंग स्क्वायड की टीम जब मौके पर पहुंची तो जंगल के भीतर का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।जांच के दौरान घने जंगलों के बीच बड़ी संख्या में पेड़ों के ठूंठ मिले, जिससे साफ संकेत मिला कि लंबे समय से सुनियोजित तरीके से अवैध कटाई की जा रही थी। अधिकारियों का मानना है कि इस स्तर की कटाई बिना संगठित गिरोह और स्थानीय नेटवर्क के संभव नहीं है।

पीपरखूंटी बीट में सबसे भयावह स्थिति

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जांच दल सबसे पहले पीपरखूंटी बीट पहुंचा। यहां जंगल के अंदर सागौन और साल के 122 से अधिक ठूंठ पाए गए। टीम ने मौके पर मौजूद वनकर्मियों से एक-एक ठूंठ की गिनती कराई। पेड़ों की कटाई कितने समय से चल रही थी, इसका भी आकलन किया गया। इसके बाद टीम ठाढ़ पथरा और आमानाला बीट पहुंची, जहां स्थिति और भी गंभीर मिली। बाहर से घना दिखाई देने वाला जंगल भीतर से उजाड़ नजर आया। कई स्थानों पर बड़े पेड़ों को काटकर खाली जमीन छोड़ दी गई थी।

इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीन से कटाई

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पेड़ों की कटाई के लिए आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक आरा मशीनों का इस्तेमाल किया गया। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि अवैध कटाई करने वाले गिरोह तकनीकी संसाधनों और मजबूत नेटवर्क के साथ काम कर रहे हैं। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी की तस्करी एक-दो दिन में संभव नहीं है। माना जा रहा है कि वर्षों से यह गतिविधि चल रही थी।

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विभागीय मिलीभगत की आशंका

इतने बड़े पैमाने पर जंगल साफ होने के बाद अब वन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। संभावना जताई जा रही है कि तस्करों का विभाग के कुछ अफसरों या फील्ड स्टाफ से गठजोड़ हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस एंगल पर भी नजर रखे हुए हैं।

ग्रामीणों ने लगाया अनसुना करने का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों ने जांच दल को बताया कि जंगलों में लंबे समय से पेड़ों की कटाई चल रही थी। इसकी जानकारी कई बार अधिकारियों को दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि तस्करों का इतना दबदबा है कि लोग खुलकर विरोध करने से डरते हैं।

पर्यावरण पर गंभीर असर

सागौन और साल जैसे पेड़ों की अवैध कटाई से न केवल वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि वन्यजीवों के आवास और पर्यावरण संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका है।


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