CG High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के एक गंभीर मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी को दी गई फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि “संत और पापी के बीच फर्क इतना है कि हर संत का एक अतीत होता है और हर पापी का एक भविष्य होता है।”
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अपराध बेहद गंभीर जरूर है, लेकिन इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि न्याय व्यवस्था में केवल दंड ही नहीं, बल्कि सुधार की संभावना को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
क्या था पूरा मामला
सक्ती जिले की एक 25 वर्षीय युवती, जो बेमेतरा में फैमिली कोर्ट में कार्यरत थी, 14 अगस्त 2022 को अपने घर से निकली लेकिन रास्ते में लापता हो गई। जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज में आरोपी शंकर निषाद को युवती के साथ देखा गया, जो उसे जंगल की ओर ले जाता नजर आया। बाद में पुलिस जांच में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया और उसकी निशानदेही पर युवती का शव बरामद हुआ।
निचली अदालत ने सुनाई थी फांसी
जांजगीर-चांपा की विशेष अदालत ने इस मामले में आरोपी को अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, कानून के तहत इस सजा पर अंतिम मुहर हाई कोर्ट की ही होती है।
हाई कोर्ट ने क्यों बदली सजा
हाई कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद पाया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उसमें सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि फांसी की सजा तभी दी जानी चाहिए, जब आजीवन कारावास पर्याप्त न हो।