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Ambikapur Court News: पटाखा दुकान अग्निकांड: कारोबारी प्रवीण अग्रवाल की अग्रिम जमानत खारिज

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Ambikapur Court News: सरगुजा। अंबिकापुर के राम मंदिर रोड स्थित पटाखा और प्लास्टिक गोदाम में हुई भीषण आगजनी मामले में कारोबारी प्रवीण अग्रवाल को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर ममता पटेल की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि घने रिहायशी इलाके में ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण और बिक्री करने वालों पर सुरक्षा मानकों का पालन करने की विशेष जिम्मेदारी होती है। अदालत ने यह भी माना कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक स्तर पर है और आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।

कोर्ट ने क्या कहा?

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अदालत ने अपने आदेश में कहा—

“गंभीर अपराध में अग्रिम जमानत मिल जाने की दशा में लिखित एवं मौखिक साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका को अनदेखा नहीं किया जा सकता।” कोर्ट ने यह भी कहा कि दुकान संचालन से जुड़े दस्तावेज जांच एजेंसी के लिए आवश्यक हैं और विवेचना के दौरान उनकी जरूरत पड़ सकती है।

क्या है पूरा मामला?

23 अप्रैल 2026 को अंबिकापुर के राम मंदिर रोड स्थित “प्रवीण एजेंसी” में भीषण आग लग गई थी। आरोप है कि दुकान में भारी मात्रा में पटाखा और प्लास्टिक सामग्री का भंडारण किया गया था। आग इतनी भयावह थी कि आसपास के मकानों तक लपटें पहुंच गईं।शिकायतकर्ता प्रतुल पांडेय ने पुलिस को बताया कि आग लगने से उनके घर का एसी, टीवी, सोफा, बेड सहित अन्य सामान जलकर खाक हो गया और मकान की दीवारों में दरारें आ गईं।

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पुलिस ने जोड़ी गंभीर धाराएं

शुरुआत में पुलिस ने सामान्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन बाद में पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। मामले में बीएनएस की धारा 324(6), 326(छ) और विस्फोटक अधिनियम की धारा 9 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। धारा 326(छ) के तहत आजीवन कारावास या 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।

पुलिस का दावा

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि आरोपी घनी आबादी वाले इलाके में पटाखों का भंडारण कर रहे थे। सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई और गोदाम की छत पर वेल्डिंग का काम भी चल रहा था, जिससे आग भड़क गई। पुलिस के अनुसार हादसे में करीब 50 से 55 लाख रुपये का नुकसान हुआ और एक बच्ची भी घायल हुई है।

व्यवसायी ने क्या दलील दी?

प्रवीण अग्रवाल ने कोर्ट में कहा कि दुकान में प्लास्टिक सामग्री का कारोबार किया जाता था और आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे स्थानीय निवासी और स्थापित कारोबारी हैं, इसलिए फरार होने की आशंका नहीं है। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।


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