CG Teacher News: रायपुर। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का तरीका जल्द बदल सकता है। विभाग अब पारंपरिक निलंबन व्यवस्था पर लगाम लगाने की तैयारी में है। इसके पीछे वजह है — निलंबन, बहाली और मनचाही पोस्टिंग के कथित खेल पर रोक लगाना। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव विभाग में प्रशासनिक सख्ती और बड़े सुधारों पर जोर दे रहे हैं। इसी कड़ी में अब ऐसे मामलों में सीधे सस्पेंड करने के बजाय कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।
निलंबन की जगह अब “डबल सजा” की तैयारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, अब शिक्षकों को निलंबित करने के बजाय दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों में ट्रांसफर किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी व्याख्याता या शिक्षक पर अनुशासनहीनता, आदेश उल्लंघन या पोस्टिंग से जुड़ी गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, तो उन्हें 150 से 200 किलोमीटर दूर स्कूलों में भेजा जा सकता है। इतना ही नहीं, लंबे समय तक उसी स्कूल में सेवा देना अनिवार्य किया जा सकता है ताकि बार-बार दबाव बनाकर पोस्टिंग बदलवाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे।
विभाग क्यों बदल रहा सिस्टम?
शिक्षा विभाग के भीतर लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि कुछ मामलों में निलंबन कार्रवाई को “सजा” नहीं बल्कि “पोस्टिंग मैनेजमेंट” का जरिया बना लिया गया है। आरोप हैं कि कुछ शिक्षक पहले आदेश का पालन नहीं करते, फिर निलंबन होता है और बाद में बहाली के साथ मनपसंद स्कूल में पोस्टिंग मिल जाती है। इसी वजह से अब विभाग ऐसे मामलों में सस्पेंशन की बजाय सीधे कठोर प्रशासनिक कदम उठाने की रणनीति बना रहा है।
युक्तियुक्तकरण के दौरान बढ़े विवाद
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के बाद कई शिक्षकों की पोस्टिंग दूरस्थ इलाकों में हुई थी। ऐसे मामलों में कई जगह यह देखने में आया कि संबंधित शिक्षक जॉइनिंग टालने के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाने लगे। विभागीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि कुछ मामलों में आदेश उल्लंघन के बाद निलंबन और फिर बहाली के जरिए नई पोस्टिंग हासिल करने की कोशिश की गई।
DPI ने मांगी थी निलंबन-बहाली की जानकारी
हाल ही में DPI ने प्रदेशभर के जेडी और डीईओ से पिछले महीनों में हुए निलंबन, बहाली और विभागीय जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी थी। इस कदम को भी विभागीय सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार अब यह समझना चाहती है कि किन परिस्थितियों में निलंबन हुए और बाद में बहाली किन आधारों पर की गई।
गंभीर मामलों में होगी विभागीय जांच
सूत्रों के मुताबिक, नई व्यवस्था में सिर्फ ट्रांसफर ही नहीं बल्कि गंभीर मामलों में सीधे विभागीय जांच भी शुरू की जा सकती है। विभाग का मानना है कि सस्पेंशन की तुलना में यह व्यवस्था ज्यादा प्रभावी होगी, क्योंकि इसमें कर्मचारी को सेवा से अलग किए बिना जवाबदेही तय की जा सकेगी।