CG High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने न्यायालयीन आदेश के पालन में देरी को गंभीरता से लेते हुए संचालक लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि तय समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक शिक्षिका द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है, जिस पर जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता शिक्षिका नंदिनी घृतलहरे वर्तमान में रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक स्थित शासकीय प्राथमिक शाला छतौना में पदस्थ हैं। उनकी नियुक्ति वर्ष 2008 में बालोद जिले के गुरूर विकासखंड में हुई थी। साल 2011 में उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद 2013 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, वर्ष 2022 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
बहाली के बाद भी बना विवाद
दोषमुक्त होने के बाद शिक्षिका ने सेवा में बहाली की मांग की, जिस पर विभाग ने उन्हें दोबारा पदस्थ कर दिया। विभागीय आदेश में यह भी कहा गया कि बर्खास्तगी से पुनः ज्वाइनिंग तक की अवधि को सेवा अवधि माना जाएगा। लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब संविलियन की गणना में उस अवधि को शामिल नहीं किया गया और सेवा संविलियन 25 नवंबर 2024 से माना गया।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुआ पालन
शिक्षिका ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने पहले ही शिक्षा विभाग को निर्देश दिया था कि मामले पर विचार कर दो महीने के भीतर निर्णय लिया जाए। आरोप है कि तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी विभाग ने कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया। इसके बाद शिक्षिका ने अवमानना याचिका दाखिल की।
कोर्ट ने दी अंतिम मोहलत
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने DPI को 28 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। साथ ही साफ कहा कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।