Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने विभाग द्वारा रिटायर्ड ज्वाइंट कमिश्नर के खिलाफ जारी चार्जशीट की प्रभावशीलता और आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता के सेवानिवृत्त होने के तीन माह बाद राज्य शासन ने आरोप पत्र जारी किया था, जिसे याचिकाकर्ता ने नियमों के विपरीत बताया।
रिटायर्ड ज्वाइंट कमिश्नर बीआर जोशी ने अधिवक्ता जितेंद्र पाली के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में बताया गया कि वे वर्ष 1993 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में नियुक्त हुए थे और पदोन्नति के क्रम में संयुक्त आयुक्त के पद से 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त हुए।
रिटायरमेंट के 3 महीने बाद थमाई गई चार्जशीट
याचिका के अनुसार सेवानिवृत्ति के करीब तीन महीने बाद 9 अप्रैल 2026 को विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय चार्जशीट जारी कर जांच प्रक्रिया शुरू की। चार्जशीट में लगाए गए आरोप वर्ष 2004-05 और 2007-08 से संबंधित बताए गए हैं। याचिका में कहा गया कि इन मामलों की जांच पहले ही सक्षम अधिकारियों, कलेक्टर और लोकायुक्त स्तर पर हो चुकी थी और जांच के बाद इन्हें बंद कर दिया गया था।
अधिवक्ता जितेंद्र पाली ने रखे ये तर्क
याचिका की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता जितेंद्र पाली ने कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के नियम 9(2)(बी)(2) के अनुसार सेवानिवृत्त कर्मचारी के विरुद्ध चार वर्ष से अधिक पुराने मामलों में विभागीय कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती। इसके अलावा नियम 9(2)(बी)(1) के तहत राज्यपाल या सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं ली गई थी।
अगली सुनवाई तक कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए 9 अप्रैल 2026 को जारी चार्जशीट के प्रभाव और उसके संचालन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिका की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद के लिए निर्धारित की है।