Bilaspur High Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद और दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में पति, सास और ससुर को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, लेकिन इसके लिए सख्त शर्त भी तय कर दी है। हाई कोर्ट ने पति अंकुर गौराहा को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर हाई कोर्ट के मीडिएशन सेंटर में एक लाख रुपये जमा करे और उसकी रसीद संबंधित जिले के एसपी को दिखाए। इसके बाद ही गिरफ्तारी पर रोक का आदेश प्रभावी माना जाएगा।
जस्टिस की बेंच ने साफ कहा है कि यदि तय समय में राशि जमा नहीं की गई तो गिरफ्तारी पर मिली अंतरिम सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाएगी और आपराधिक याचिका भी बिना किसी अतिरिक्त आदेश के स्वतः खारिज मानी जाएगी।
मीडिएशन सेंटर में पति-पत्नी की उपस्थिति के निर्देश
हाई कोर्ट ने पति-पत्नी दोनों को 8 जून 2026 को हाई कोर्ट के मीडिएशन सेंटर में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, इसलिए पहले मध्यस्थता के माध्यम से आपसी विवाद सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मीडिएशन सेंटर प्रभारी को भी निर्देश दिया है कि दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना तलाशें। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अंतिम समझौता हो जाता है तो जमा कराई गई राशि को उसी में समायोजित किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
राजकिशोर नगर बिलासपुर निवासी अंकुर गौराहा (32), उनके पिता राकेश गौराहा (64) और मां रेखा गौराहा के खिलाफ अंकुर की पत्नी भाव्या गौराहा ने सारंगढ़ थाना में दहेज प्रताड़ना और क्रूरता का मामला दर्ज कराया था। तीनों आरोपियों ने अधिवक्ता मलय श्रीवास्तव के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर और आगे की दंडात्मक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में कहा कि पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनका यह भी कहना था कि शिकायत काफी देरी से दर्ज कराई गई है और उसमें दहेज मांग या प्रताड़ना के स्पष्ट एवं विश्वसनीय आरोप नहीं हैं।
29 जून तक गिरफ्तारी पर रोक
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 29 जून 2026 तक याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने शर्त रखी है कि सभी आरोपी जांच में पूरा सहयोग करेंगे।