Bilaspur High Court: पुलिस प्राइवेट रिकवरी एजेंट नहीं, 53 करोड़ होल्ड करने पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Share on

Bilaspur High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस का काम अपराध की जांच करना है, किसी पक्ष के लिए प्राइवेट रिकवरी एजेंट की तरह काम करना नहीं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने NBFC कंपनी के बैंक खाते में रकम होल्ड करने के पुलिस आदेश को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए किसी कंपनी के बैंक खाते को फ्रीज या होल्ड करना कानून के खिलाफ है।

पढ़िए क्या है पूरा मामला?

मामला नई दिल्ली स्थित NBFC कंपनी ‘ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड’ से जुड़ा है। कंपनी छोटे कारोबारियों और उद्योगों को लोन देने का काम करती है। कंपनी का कोटक महिंद्रा बैंक रायपुर शाखा में खाता संचालित है, जिसमें प्रतिदिन 12 से 15 करोड़ रुपये तक की EMI राशि जमा होती है। कंपनी ने रायपुर की श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट लिमिटेड को करीब 10 करोड़ रुपये का लोन दिया था। बाद में माल सप्लाई को लेकर OFB टेक कंपनी और श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट्स के बीच वजन में कथित गड़बड़ी का विवाद हुआ, जिसके बाद मंदिर हसौद थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने 53 करोड़ रुपये होल्ड कर दिए

जांच के दौरान मंदिर हसौद पुलिस ने आक्सीजो कंपनी के खाते पर रोक लगा दी और 53.47 करोड़ रुपये की राशि को होल्ड कर दिया। बाद में यह राशि घटाकर 43.38 लाख रुपये तक सीमित करने का नया आदेश जारी किया गया। कंपनी ने इस कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिन्हा ने रखा पक्ष

याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिन्हा और विवेक चोपड़ा ने दलील दी कि कंपनी न तो FIR में आरोपी है और न ही कथित धोखाधड़ी से उसका सीधा संबंध है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एक सिविल और कमर्शियल विवाद में दबाव बनाने के लिए कंपनी का पूरा बैंकिंग संचालन ठप कर दिया, जो व्यापार करने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।

हाई कोर्ट ने BNSS की धाराओं की दी व्याख्या

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने BNSS की धारा 106 का गलत इस्तेमाल किया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया—

  • धारा 106 केवल चोरी की संपत्ति या सीधे संदिग्ध वस्तुओं की जब्ती के लिए है।
  • यदि मामला बैंक खातों या अपराध से अर्जित रकम का हो, तो धारा 107 BNSS लागू होगी।
  • इसके लिए पुलिस अधीक्षक की लिखित अनुमति और मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी होती है।
  • प्रभावित पक्ष को 14 दिन का नोटिस देना भी अनिवार्य है।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने पूरी वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार कर मनमाना आदेश जारी किया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने कहा—

“पुलिस का काम अपराध की जांच करना है, किसी कमर्शियल विवाद में एक पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए निजी वसूली एजेंट की तरह काम करना नहीं।” कोर्ट ने यह भी कहा कि शुरुआती शिकायत में नुकसान कुछ लाख रुपये का बताया गया था, लेकिन उसके बदले 53 करोड़ रुपये होल्ड कर देना पूरी तरह असंगत और दंडात्मक कार्रवाई है।

बैंक खाते से हटेगा होल्ड

हाई कोर्ट ने 13 अप्रैल 2026 को जारी पुलिस आदेश को रद्द करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक को निर्देश दिया कि कंपनी के खाते से सभी प्रतिबंध तत्काल हटाए जाएं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस को किसी रकम पर संदेह है, तो वह कानून के अनुसार मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 107 BNSS के तहत कार्रवाई कर सकती है, लेकिन सीधे मनमाना फैसला नहीं ले सकती।


Share on
Also Read
Loading latest news...
```

About Civil India News

© 2026 Civil India. All Rights Reserved. Unauthorized copying or reproduction is strictly prohibited
error: Content is protected by civil India news, Civil India has all rights to take legal actions !!