BREAKING: शिक्षाकर्मियों को नहीं मिलेगी पेंशन, हाई कोर्ट के निर्देश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश

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CG News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों की पुरानी पेंशन की मांग को लेकर चल रही बहस के बीच स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लेते हुए साफ कर दिया है कि शिक्षाकर्मियों को पूर्व सेवा अवधि जोड़कर पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। स्कूल शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह ने इस संबंध में स्पष्ट स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर दिया है। इस आदेश के साथ ही छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में लंबित सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच से जुड़े मामलों का भी पटाक्षेप हो गया है। विभाग ने दावा किया है कि कोर्ट के निर्देशों का अक्षरश: पालन करते हुए आदेश जारी किया गया है, इसलिए अब अवमानना याचिका की संभावना भी लगभग समाप्त हो गई है।

टीचर्स एसोसिएशन के ज्ञापन के 72 घंटे बाद जारी हुआ आदेश

बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने हाल ही में डीपीआई और स्कूल शिक्षा सचिव से मुलाकात कर पुरानी पेंशन लागू करने की मांग रखी थी। यह मुद्दा सोशल मीडिया और शिक्षक संगठनों में तेजी से चर्चा में था। इधर मंत्रालय में फाइलों की समीक्षा शुरू हुई और स्कूल शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह ने पूरे मामले का परीक्षण कराया। समीक्षा में यह पाया गया कि हाई कोर्ट के किसी भी आदेश में शासन को शिक्षाकर्मियों की पूर्व सेवा अवधि जोड़कर पुरानी पेंशन देने का निर्देश नहीं दिया गया है।

हाई कोर्ट ने सिर्फ स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने कहा था

विभागीय समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच दोनों ने शासन को केवल 120 दिनों के भीतर एक तर्कसंगत स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह स्पष्ट करने को कहा था कि शिक्षाकर्मियों को पेंशन लाभ कब और किन आधारों पर मिल सकता है। इसी आधार पर विभाग ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए आदेश जारी कर दिया कि शिक्षाकर्मियों को पूर्व सेवा अवधि के आधार पर पुरानी पेंशन का लाभ देने का कोई प्रावधान नहीं है।

डीपीआई ऋतुराज रघुवंशी ने तैयार कराया प्रस्ताव

सूत्रों के मुताबिक स्कूल शिक्षा सचिव के निर्देश के बाद डीपीआई ऋतुराज रघुवंशी ने तत्काल फाइल प्रक्रिया आगे बढ़ाई और प्रस्ताव तैयार कराया। इसके बाद बुधवार को विभागीय आदेश जारी कर दिया गया।

अवमानना याचिका की संभावना खत्म

विभागीय आदेश जारी होने के बाद अब शिक्षाकर्मी अवमानना याचिका दायर नहीं कर सकेंगे। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि विभाग कोर्ट के निर्देश के बावजूद कोई निर्णय नहीं लेता, तब अवमानना का आधार बन सकता था।अधिवक्ताओं का कहना है कि विभाग ने समय सीमा के भीतर अपना स्पष्ट पक्ष रख दिया है, इसलिए कोर्ट की अवमानना का मामला अब कमजोर हो गया है।

सोना साहू प्रकरण का भी दिया जा रहा उदाहरण

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सोना साहू मामले में विभाग द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं करने से अवमानना की स्थिति बनी थी और बाद में विभाग को लाभ देना पड़ा था। लेकिन इस बार विभाग ने समय रहते आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

सचिव कमलप्रीत सिंह ने तुरंत लिया संज्ञान

बताया जा रहा है कि स्कूल शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह ने जैसे ही पूरे मामले की जानकारी ली, उन्होंने न्यायालयीन आदेशों का परीक्षण कराया। समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि कोर्ट ने कहीं भी सरकार को पुरानी पेंशन लागू करने का बाध्यकारी निर्देश नहीं दिया है। इसके बाद 120 दिन की समय सीमा पूरी होने से पहले ही विभाग ने अपना अंतिम स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर दिया।


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