Supreme Court News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित बलौदाबाजार कलेक्टोरेट आगजनी और हिंसा मामले में जेल में बंद अमित बघेल की जमानत याचिका अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अमित बघेल ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही मामले को पहले से लंबित संबंधित याचिका के साथ जोड़कर एक साथ सुनवाई करने का आदेश दिया है।
हाई कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
3 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस चंद्रशेखर की डिवीजन बेंच ने याचिका पर विचार करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दस्ती नोटिस की भी अनुमति दी, ताकि नोटिस की तामील शीघ्र हो सके। अब इस मामले की सुनवाई पहले से लंबित संबंधित याचिका के साथ की जाएगी।
हाई कोर्ट ने इन आधारों पर खारिज की थी जमानत
अमित बघेल ने हाई कोर्ट में दावा किया था कि घटना के समय वह अपनी पत्नी के रजिस्ट्री कार्य के सिलसिले में रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद थे। हालांकि कोर्ट ने कहा कि प्रस्तुत दस्तावेज उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति साबित नहीं करते। जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच ने 19 मई 2026 को अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए माना था कि साइबर सेल की रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और पुलिस अधिकारियों के बयानों के आधार पर अमित बघेल और अजय यादव पर भीड़ को उकसाने और हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाने के प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार हैं।
13 से 15 करोड़ की संपत्ति को हुआ था नुकसान
यह मामला 10 जून 2024 को बलौदाबाजार में हुई हिंसा से जुड़ा है। गिरौदपुरी धाम में जैतखाम क्षतिग्रस्त होने के विरोध में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उग्र भीड़ ने पुलिस पर हमला किया, कलेक्टोरेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में आगजनी की तथा बड़ी संख्या में सरकारी वाहनों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इस घटना में लगभग 13 से 15 करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ था।
अभियोजन पक्ष ने हाई कोर्ट में यह भी बताया था कि अमित बघेल के खिलाफ पहले से 17 और अजय यादव के खिलाफ 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के जवाब के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।