ACB का बड़ा एक्शन: आरआई प्रमोशन घोटाले में बस्तर से सरगुजा तक छापे, लाखों लेकर पास कराने का आरोप, राजस्व विभाग के अफसरों में हड़कंप
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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राजस्व निरीक्षक (RI) प्रमोशन घोटाले में एसीबी ने शुक्रवार तड़के बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में एक साथ कई ठिकानों पर छापे मारे। बस्तर से लेकर सरगुजा तक फैले इस अभियान में राजस्व विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और प्रश्नपत्र छापने वाले प्रिंटर निशाने पर आए। बताया जा रहा है कि एसीबी की टीमें आधी रात को रायपुर से रवाना हुईं और सुबह होते-होते कई जगहों पर एक साथ दबिश दी। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, छापे के दौरान कई अफसरों के घरों में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह जब एसीबी टीम ने उनके घर की घंटी बजाई, तो परिवार के लोग भी चौंक गए। पहचान बताने के बाद अफसरों को समझ आया कि मामला गंभीर है।

कैसे रचा गया घोटाला

आरआई प्रमोशन घोटाले का पूरा खेल बड़ी योजना के साथ रचा गया था। आरोप है कि पटवारी से आरआई बनाए जाने की प्रक्रिया 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान जानबूझकर शुरू की गई, ताकि सत्ता परिवर्तन के बीच गड़बड़ी छिपाई जा सके। अधिकारियों ने आरोपियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र हल करवा दिए थे। कई पटवारियों से 10-10 लाख रुपये तक वसूले गए। इसके बदले उन्हें रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति दी गई। शिकायत में यह भी सामने आया कि परीक्षा से पहले ही पेपर लीक कर दिया गया था। जिन उम्मीदवारों ने पैसे दिए थे, उन्हें एक ही केंद्र पर बिठाकर प्रश्नपत्र हल कराए गए। कई जगह एक ही रोल नंबर दो या तीन उम्मीदवारों को आवंटित किए गए।

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ओएमआर शीट में मोबाइल नंबर, गोपनीयता पर सवाल

कमिश्नर लैंड रिकॉर्ड ऑफिस द्वारा आयोजित इस परीक्षा में ओएमआर शीट पर परीक्षार्थियों से मोबाइल नंबर लिखवाए गए, जो परीक्षा की गोपनीयता के खिलाफ है। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में बाद में संशोधन किए गए और नाम बदलकर नए उम्मीदवारों को चयन सूची में शामिल किया गया।

जांच कमेटी ने मानी गड़बड़ी, फिर से परीक्षा की सिफारिश

सरकार द्वारा नियुक्त आईएएस केडी कुंजाम की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर खामियों की पुष्टि की। रिपोर्ट में कहा गया कि परीक्षा से पहले कई चयनित उम्मीदवारों को एक ही स्थान पर एकत्र कर प्रश्नपत्र हल कराए गए। कमेटी ने पूरी परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने की सिफारिश की।

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परिवारजनों को एक साथ पास किया गया

जांच में यह भी सामने आया कि एक ही परिवार के सदस्यों को एक साथ चयन सूची में शामिल किया गया। पति-पत्नी, सगे भाई, साली और रिश्तेदारों को एक ही परीक्षा केंद्र पर पास करवाया गया। यहां तक कि एक आईएएस अधिकारी का भतीजा, जिसने पाँच साल की सेवा भी पूरी नहीं की थी, उसे भी आरआई बना दिया गया।

पाठ्यक्रम में बदलाव और पेपर आउट ऑफ कोर्स

कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्व निरीक्षक परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम दो बार जारी किया गया था, लेकिन प्रश्नपत्र में ‘भुइयां सॉफ्टवेयर’ से जुड़े सात प्रश्न पूछे गए, जबकि यह सिलेबस में शामिल ही नहीं था। इससे यह स्पष्ट होता है कि पेपर जानबूझकर भ्रमित करने वाला बनाया गया था ताकि सिर्फ तय उम्मीदवार ही पास हो सकें।

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आगे क्या होगा

राज्य सरकार ने एसीबी और ईओडब्ल्यू को पूरे घोटाले की जांच सौंप दी है। फिलहाल दर्जनभर अफसरों और कर्मचारियों के घरों से दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और संदिग्ध कागजात बरामद किए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में मिली जानकारी के आधार पर और भी छापे की संभावना जताई जा रही है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा “आंतरिक भर्ती घोटाला” हो सकता है, जिसमें प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत के संकेत मिले हैं। जांच के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।


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